TMC Rebel MPs NDA Support: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। पार्टी की बागी सांसद और पूर्व मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया है कि उनके साथ सांसदों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। बागी खेमे का कहना है कि वह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अलग संसदीय समूह की मान्यता मांगेगा। सूत्रों के अनुसार, यह गुट क्षेत्रीय राजनीतिक मंच NCPI के साथ जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ सकता है और संसद में NDA को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
काकोली घोष दस्तिदार ने हालिया बयान में कहा कि उनके साथ दो और सांसद जुड़ने वाले हैं, जिससे बागी सांसदों की संख्या 22 तक पहुंच सकती है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह TMC के लोकसभा सांसदों का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा होगा। ऐसी स्थिति में दलबदल कानून के तहत बागी गुट को महत्वपूर्ण कानूनी बढ़त मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सांसदों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि TMC के राष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है।
बागी सांसदों का गुट पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर NDA को समर्थन देने की इच्छा जता चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, कई सांसदों ने केंद्र की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के साथ सहयोग की बात कही है, हालांकि उन्होंने सीधे भाजपा में शामिल होने की संभावना से इनकार किया है। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि इससे संसद में NDA की ताकत और बढ़ सकती है।
TMC प्रमुख ममता बनर्जी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने हाल के दिनों में संगठनात्मक फेरबदल कर कई बागी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों से हटाया है। इसके बावजूद असंतोष कम होता नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद अलग राह चुनते हैं तो इसका असर न केवल संसद में बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
बागी खेमे में कई चर्चित सांसदों के शामिल होने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ सांसद भी अब इस गुट के साथ दिखाई दे रहे हैं, जिससे TMC नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है। यही कारण है कि बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को "बड़ा खेला" कहा जा रहा है।
अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर टिकी हुई है। यदि बागी सांसद औपचारिक रूप से अलग संसदीय समूह की मान्यता मांगते हैं, तो उनकी संख्या और संसदीय नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। यह फैसला आने वाले दिनों में संसद की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।
TMC के भीतर चल रहा असंतोष अब खुली राजनीतिक चुनौती का रूप लेता दिखाई दे रहा है। काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में बागी सांसदों का गुट लगातार मजबूत होने का दावा कर रहा है और NDA को समर्थन देने के संकेत दे रहा है। हालांकि NCPI में शामिल होने और अलग गुट की मान्यता को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। आने वाले दिनों में स्पीकर का फैसला और बागी सांसदों की अगली रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
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