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12 साल में 88% घटे ट्रेन हादसे, जानिए कैसे बदली भारतीय रेलवे की तस्वीर

by | Jul 30, 2026 | Breaking, News Big, देश

Railway Safety Measures: भारतीय रेलवे ने ट्रेन संचालन और यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले 12 वर्षों में तकनीकी सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सुरक्षा उपायों के चलते रेल हादसों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में जहां 135 ट्रेन हादसे हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या 88% घटकर सिर्फ 16 रह गई। जून 2026 तक केवल 2 रेल दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। वहीं दुर्घटना सूचकांक भी 2014-15 के 0.11 से 91% घटकर 2025-26 में 0.01 पर पहुंच गया।

सुरक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रेल हादसों में कमी के पीछे सुरक्षा पर बढ़ा निवेश बड़ी वजह माना जा रहा है। 2013-14 में रेलवे ने सुरक्षा मद में 39,200 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो बढ़कर 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रुपये हो गया। वहीं 2026-27 के लिए सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर रिकॉर्ड 1,20,389 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

सिग्नलिंग सिस्टम हुआ स्मार्ट

मानवीय भूलों से होने वाले हादसे रोकने के लिए रेलवे ने सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया है। 6,671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और कंप्लीट ट्रैक सर्किटिंग लागू की गई है, जबकि 10,395 लेवल क्रॉसिंग इंटरलॉकिंग से जोड़ी जा चुकी हैं। सिग्नलिंग कार्यों के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल भी लागू किए गए हैं।

लोको पायलटों के लिए हाईटेक सुरक्षा

लोको पायलटों की सतर्कता बढ़ाने के लिए सभी इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (VCD) लगाए गए हैं। कोहरे में सुरक्षित संचालन के लिए GPS आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस (FSD) और रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे पायलटों को पहले से सिग्नल और क्रॉसिंग की जानकारी मिल जाती है।

मजबूत ट्रैक और आधुनिक मेंटेनेंस

रेलवे ने मजबूत पटरियों, पीएससी स्लीपर और आधुनिक ट्रैक मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया है। USFD टेस्ट, ट्रैक रिकॉर्डिंग कार, फ्लैश बट वेल्डिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए पटरियों की लगातार निगरानी और समय पर रखरखाव किया जा रहा है।

सुरक्षित कोच और फायर सेफ्टी पर जोर

रेलवे ने पुराने ICF कोचों की जगह सुरक्षित LHB कोच शामिल किए हैं। सभी ब्रॉड गेज मार्गों से मानवरहित फाटक हटाए जा चुके हैं। वहीं पावर और पेंट्री कारों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम तथा अन्य डिब्बों में चरणबद्ध तरीके से आग और धुआं पहचानने वाले उपकरण लगाए जा रहे हैं।

रेलवे का सुरक्षा कवच बना 'कवच 4.0'

स्वदेशी कवच 4.0 ट्रेन सुरक्षा प्रणाली जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगाकर दुर्घटनाओं का खतरा कम करती है। 20 जुलाई 2026 तक इसे 2,569 रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्ग शामिल हैं।

पूरे देश में तेजी से बढ़ रहा कवच नेटवर्क

रेलवे अब 21,858 रूट किलोमीटर पर कवच का विस्तार कर रहा है। अब तक 11,253 किमी ऑप्टिकल फाइबर, 1,668 टेलीकॉम टावर, 988 स्टेशन डेटा सेंटर और 6,153 लोकोमोटिव में कवच लगाया जा चुका है। हजारों अन्य इंजनों और ईएमयू/एमईएमयू ट्रेनों में भी इसे तेजी से स्थापित किया जा रहा है।