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होर्मुज पर ट्रंप का नया प्लान! फीस के बाद निवेश का फॉर्मूला, क्या बढ़ेगा ईरान पर दबाव?

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक टकराव लगातार गहराता नजर आ रहा है। एक ओर ईरान इस अहम समुद्री मार्ग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा, निवेश और ऊर्जा व्यापार को जोड़ते हुए नई रणनीति के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

होर्मुज को लेकर अमेरिका की बदली रणनीति

अब तक ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आर्थिक लाभ कमाने की कोशिशों के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को नए रूप में पेश कर रहा है। शुरुआत में ट्रंप ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे व्यापार और निवेश समझौतों से जोड़ने का फैसला किया। भले ही भाषा बदली गई हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बनी रहेगी।

निवेश समझौतों का ऐलान

ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि मध्य पूर्व के नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद अमेरिका की 20 प्रतिशत रीइम्बर्समेंट फीस को व्यापार और निवेश समझौतों में बदलने का फैसला किया गया है। उनके मुताबिक खाड़ी देश अमेरिका में निवेश करेंगे और यह व्यवस्था सभी पक्षों के लिए लाभदायक होगी। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर वैश्विक तेल व्यापार और कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान की चेतावनी, तेल निर्यात पर रोक की बात

इस बीच ईरानी सेना ने कहा है कि जब तक अमेरिका के साथ संघर्ष जारी रहेगा, तब तक इस क्षेत्र से तेल और गैस के निर्यात को प्रभावित किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में कमी देखी जा रही है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात से रवाना होने वाले कुछ टैंकर सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

ट्रंप ने बताए वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग

ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प विकसित कर रहा है। उन्होंने टेक्सास और अलास्का का उल्लेख करते हुए कहा कि पाइपलाइन परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है और आने वाले समय में ये क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अमेरिका बढ़ा रहा तेल उत्पादन

अमेरिका अपने घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। टेक्सास के पर्मियन बेसिन और ईगल फोर्ड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है, जबकि अलास्का में भी नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। आधुनिक तकनीकों की मदद से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है और वर्ष 2027 तक प्रतिदिन 1.42 करोड़ बैरल तेल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

होर्मुज के विकल्प पर काम

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्ग भी विकसित कर रहा है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस को नई पाइपलाइन परियोजनाओं के जरिए यूरोप और एशिया तक पहुंचाने की योजना पर काम जारी है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम की जा सके।

इजराइल के जरिए नई ऊर्जा आपूर्ति की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक, भविष्य में यूएई, सऊदी अरब और कतर की ऊर्जा पाइपलाइन परियोजनाओं को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। इसके बाद तेल को लाल सागर और इजराइल के ईलात-अश्केलोन पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए भूमध्य सागर तक पहुंचाने की योजना बनाई जा सकती है। इससे तेल परिवहन का वैकल्पिक और अपेक्षाकृत तेज मार्ग तैयार हो सकता है।

हूती हमलों से बढ़ा दबाव

होर्मुज के साथ-साथ लाल सागर क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हूती विद्रोहियों की गतिविधियों में तेजी आने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस मोर्चे का इस्तेमाल अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए कर सकता है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम केवल सैन्य या राजनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी जुड़ा हुआ है। यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर तेल की आपूर्ति, कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर देखने को मिल सकता है।

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