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यूपी में जनगणना का अगला चरण, हर जिले की बनेगी सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट, 22 अगस्त तक गांव-शहर का सत्यापित डेटा मांगा

UP Census Verified Data Deadline: उत्तर प्रदेश में जनगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जनगणना निदेशालय, लखनऊ ने प्रदेश के सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए 22 अगस्त तक गांवों और कस्बों से संबंधित सत्यापित आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है। इन आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक जिले की विस्तृत सामाजिक और आर्थिक स्थिति को दर्शाने वाली रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पहले चरण में हुआ था घर-घर सर्वे

जनगणना के पहले चरण का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इस चरण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया था। सर्वे में लोगों के जीवन स्तर और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई थी। इसमें पेयजल, बिजली, शौचालय, आवासीय स्थिति और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता का रिकॉर्ड तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

तैयार होगी डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक

पहले चरण में जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर अब प्रत्येक जिले की डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक (DCHB) तैयार की जाएगी। यह दस्तावेज किसी जिले की सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी स्थिति का विस्तृत विवरण प्रदान करेगा। रिपोर्ट में गांवों और शहरों दोनों का समग्र डेटा शामिल होगा, जिससे प्रशासन को विकास योजनाएं तैयार करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी।

विकास योजनाओं के लिए बनेगा आधार

विशेषज्ञों के अनुसार, जिला जनगणना पुस्तिका भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और किन इलाकों में अतिरिक्त निवेश या विकास कार्यों की आवश्यकता है। सरकारी विभाग भी इन आंकड़ों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जलापूर्ति और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में करते हैं।

राज्य स्तरीय बैठक में तय हुई समयसीमा

हाल ही में राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की बैठक में जनगणना से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई थी। बैठक में विभिन्न चरणों की प्रगति पर चर्चा हुई और जिला जनगणना पुस्तिका तैयार करने की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसी के तहत सभी जिलों को 22 अगस्त तक सत्यापित आंकड़े भेजने की समयसीमा निर्धारित की गई है।

प्रशासन ने बढ़ाई तैयारियां

जनगणना निदेशालय के निर्देशों के बाद प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि भेजे जाने वाले आंकड़े पूरी तरह सटीक और प्रमाणित हों, ताकि जिलेवार रिपोर्ट विश्वसनीय और उपयोगी बन सके।

उत्तर प्रदेश में जनगणना का अगला चरण राज्य की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को और स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 22 अगस्त तक जुटाए जाने वाले सत्यापित आंकड़ों के आधार पर तैयार होने वाली जिला जनगणना पुस्तिकाएं भविष्य की विकास योजनाओं और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगी।

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