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US का भारतीय IT कंपनियों पर शिकंजा, TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन फ्रीज

US Green Card Freeze Indian IT Companies: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा नियमों को सख्त करते हुए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस समेत आठ कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदनों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत नौ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की जांच शुरू की गई है। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य वीजा प्रक्रिया में धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों को होने वाले नुकसान पर रोक लगाना है।

किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने बताया कि कॉग्निजेंट, इंफोसिस, TCS, विप्रो, HCL टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी के नए और लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों पर रोक रहेगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह उन्हें नियुक्त करती हैं। इन कंपनियों ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि TCS ने टिप्पणी करने से इनकार किया।

H-1B वीजा पर क्या होगा असर?

PERM प्रक्रिया अधिकांश रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए जरूरी है। इसमें कंपनियों को साबित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों और रोजगार के अवसरों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। मंजूरी के बाद आवेदन अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पास जाता है।

यह रोक मौजूदा H-1B वीजाधारकों को सीधे प्रभावित करती नहीं दिखती, लेकिन स्थायी निवास पाने का रास्ता बाधित हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 में Amazon H-1B लाभार्थियों का सबसे बड़ा नियोक्ता था, जिसके बाद TCS, Infosys, Apple और Microsoft रहे। Permtrack.app के अनुसार, PERM आवेदन दाखिल करने में Microsoft सबसे आगे है।

9 विश्वविद्यालयों की भी जांच

जांच के दायरे में हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, ब्राउन और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) समेत नौ विश्वविद्यालय हैं। वेंस ने आरोप लगाया कि संस्थान अमेरिकी वेतन को प्रभावित करने के लिए J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा का दुरुपयोग कर रहे हैं। श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने बताया कि समन जारी किए जा चुके हैं।

H-1B वीजा शुल्क भी बढ़ाने की तैयारी

सितंबर 2025 में ट्रंप ने नए H-1B आवेदनों पर 1 लाख डॉलर शुल्क घोषित किया था, जिसे जून 2026 में अमेरिकी अदालत ने रोक दिया। अगस्त 2026 में प्रशासन ने नया 1,03,265 डॉलर शुल्क प्रस्तावित किया, जो सालाना 85,000 की सीमा के तहत आने वाले H-1B आवेदनों पर लागू होता।

ये भी पढ़े: दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को मंजूरी नहीं, 57 मेट्रो स्टेशन बंद रखने की तैयारी; कई ट्रेनें रद्द

Tanisha Verma

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