होम = दुनिया = 4 जुलाई पर दुनिया की नजर: US मनाएगा 250वां स्वतंत्रता दिवस, Iran देगा खामेनेई को अंतिम विदाई

4 जुलाई पर दुनिया की नजर: US मनाएगा 250वां स्वतंत्रता दिवस, Iran देगा खामेनेई को अंतिम विदाई

by | Jun 29, 2026 | दुनिया

Khamenei Funeral: जुलाई की शुरुआत में दुनिया की निगाहें दो बड़े आयोजनों पर टिकी होंगी। एक ओर अमेरिका 4 जुलाई को अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस भव्य समारोहों के साथ मनाएगा, वहीं ईरान 3 से 5 जुलाई के बीच अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देगा। दोनों कार्यक्रम वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

अमेरिका में जश्न, ईरान में अंतिम संस्कार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह 4 जुलाई को नेशनल मॉल में आयोजित विशेष समारोह को संबोधित करेंगे। दूसरी ओर, ईरान को उम्मीद है कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में करोड़ों लोग शामिल होंगे। यदि ऐसा होता है तो यह दुनिया का सबसे बड़ा जनसमूह माना जाएगा। इससे पहले 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे में करीब एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। खामेनेई पश्चिम एशिया के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में थे और इस वर्ष 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों में उनकी मौत हुई थी।

प्रतीकात्मक तारीख और अमेरिका-ईरान संबंध

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 13 हजार से अधिक हवाई हमले किए थे, जिसके कारण अंतिम संस्कार टालना पड़ा। बाद में 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ और 17 जून को राष्ट्रपति ट्रंप तथा ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने युद्ध समाप्ति के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने 3-5 जुलाई की तारीखें सोच-समझकर चुनी हैं। ईरान पहले भी अमेरिका को राजनीतिक संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक तारीखों का इस्तेमाल करता रहा है। 4 नवंबर 1979 को ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया था। 444 दिन बाद 20 जनवरी 1981 को उनकी रिहाई उसी दिन हुई, जब राष्ट्रपति जिमी कार्टर व्हाइट हाउस छोड़ रहे थे। अप्रैल 1980 में कार्टर का सैन्य बचाव अभियान हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारण विफल हो गया था, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए। इस संकट ने कार्टर की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया और रोनाल्ड रीगन के सत्ता में आने का रास्ता साफ हुआ।

45 साल बाद भी कायम है टकराव

हालिया पांच सप्ताह के युद्ध में ईरान को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन अमेरिका अपने प्रमुख लक्ष्य हासिल नहीं कर सका। न सत्ता परिवर्तन हुआ, न ईरान ने उच्च संवर्धित यूरेनियम छोड़ा, न परमाणु कार्यक्रम या बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना समाप्त की और न ही क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों का समर्थन खत्म किया। इसके उलट ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया, जहां से दुनिया के करीब 25% तेल की आपूर्ति होती है। इस संघर्ष के बाद ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स काउंसिल (IRGC) का प्रभाव और मजबूत हुआ है। खामेनेई को मशहद या तेहरान स्थित रुहोल्लाह खुमैनी के लगभग 2 अरब डॉलर की लागत वाले मकबरे में दफनाने पर फैसला होना बाकी है, लेकिन पूरा आयोजन राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।

ट्रंप के सामने नई राजनीतिक चुनौती

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में 2017 के महसा अमीनी आंदोलन और दिसंबर 2025 के आर्थिक विरोध प्रदर्शनों जैसे बड़े जनआंदोलन हुए, जिन्हें सरकार ने बलपूर्वक दबा दिया। वहीं ट्रंप ने 2017 में अपने शपथ ग्रहण समारोह की भीड़ को लेकर मीडिया रिपोर्टों पर सवाल उठाए थे, इसलिए वे जनसमर्थन के राजनीतिक महत्व को अच्छी तरह समझते हैं।

ईरान का मुद्दा कभी रोनाल्ड रीगन के लिए भी बड़ी चुनौती रहा। सार्वजनिक रूप से हथियार प्रतिबंध बनाए रखने के बावजूद उनकी सरकार ने गुप्त रूप से ईरान को हथियार बेचे, जो आगे चलकर ईरान-कॉन्ट्रा विवाद बना। मार्च 1987 में रीगन ने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की, हालांकि उन पर महाभियोग नहीं चला।

वर्तमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है। ट्रंप की लोकप्रियता 37-41% के बीच बताई जा रही है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव उनके दूसरे कार्यकाल की दिशा तय करेंगे। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करती है तो ट्रंप के लिए अगले दो वर्ष कठिन हो सकते हैं।

भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। अंतिम संस्कार की मुख्य रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी।

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