US Iran Conflict: IRGC ने दावा किया कि उसने सीरिया, कुवैत, ओमान, बहरीन और जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। उसके अनुसार जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस और प्रिंस हसन एयर बेस, कुवैत के कैंप अल-उदेइरी और अली अल-सलेम एयर बेस, तथा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि हमलों में कमांड सेंटर, ड्रोन हैंगर, गोला-बारूद डिपो, ईंधन भंडार, विमान शेल्टर, मुख्यालय और रणनीतिक पुलों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक इन हमलों या सैनिकों के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
जॉर्डन में अमेरिका की प्रमुख सैन्य मौजूदगी मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर है, जहां लड़ाकू विमान, ड्रोन और सपोर्ट फोर्स तैनात हैं। इसके अलावा टावर-22, प्रिंस हसन एयर बेस, किंग फैसल एयर बेस और अन्य प्रशिक्षण व सीमा चौकियों पर भी अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अनुमानतः जॉर्डन में 3,000 से 4,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
मिसाइल इंटरसेप्ट और युद्ध का असर
IRGC ने दावा किया कि उसकी मिसाइलों ने मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया। ओपन-सोर्स फुटेज में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लॉन्च होने और कई टकराव दिखाई देने का दावा किया गया है। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई 10 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया, जिससे कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
हताहतों के आंकड़े
ईरान के अनुसार हालिया अमेरिकी हमलों में 46 लोगों की मौत और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें शुक्रवार को पुल पर हुए हमले में मारे गए 8 लोग भी शामिल हैं। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सोमवार से अब तक 13 अमेरिकी सैनिक (10 आर्मी और 3 नेवी) घायल हुए हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 427 के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

