Islamabad: Switzerland के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में दो दिनों तक चली वार्ता के बाद अमेरिका और ईरान ने अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। सोमवार को पाकिस्तान और कतर की ओर से जारी संयुक्त बयान में इसकी जानकारी दी गई।
इस्लामाबाद MoU के तहत हुई वार्ता
रविवार और सोमवार को हुई यह बैठक पिछले गुरुवार को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)' के तहत आयोजित की गई। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाना था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी वार्ता को सुगम बनाने में भूमिका निभाई।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरानी दल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने संभाला।
उच्च स्तरीय समिति और तकनीकी वार्ता शुरू होगी
लेक लूसर्न समिट के बाद जारी बयान में कहा गया कि ईरान, अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों ने एमओयू के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की। समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न मुद्दों की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समूह गठित किया जाएगा। साथ ही, अंतिम समझौते की नींव रखने के लिए तत्काल तकनीकी वार्ताएं शुरू करने पर सहमति बनी है।
होरमुज जलडमरूमध्य के लिए विशेष संचार तंत्र
पक्षों के बीच गलतफहमियों और किसी भी घटना को रोकने के लिए एक विशेष संचार चैनल स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
ईरान और ओमान के बीच स्थित होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग माना जाता है। इसके जरिए सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख उत्पादकों का कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। हाल में ईरान-अमेरिका संघर्ष और जहाजरानी पर प्रतिबंधों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया।
लेबनान में युद्धविराम पर भी चर्चा जारी
संयुक्त बयान के अनुसार, एमओयू के तहत लेबनान में सैन्य गतिविधियों की समाप्ति से जुड़े तकनीकी स्तर के वार्ताकार सप्ताह के शेष दिनों में भी बर्गेनस्टॉक में बातचीत जारी रखेंगे। सप्ताहांत में कराया गया युद्धविराम फिलहाल प्रभावी दिखाई दे रहा है और इजरायल ने सीमा के नजदीकी कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंधों में ढील दी है।
हालांकि, इजरायल और हिज्बुल्लाह अमेरिका-ईरान समझ के पक्षकार नहीं हैं। इजरायल ने कहा है कि सुरक्षा खतरे खत्म होने तक उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी, जबकि हिज्बुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि वह तभी हमले रोकेगा जब इजरायल अपनी सेना हटाने की प्रतिबद्धता जताएगा।
संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तान और कतर रचनात्मक माहौल में वार्ता जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास करते रहेंगे। दोनों देशों ने बातचीत में सहयोग और समर्थन देने वाले मित्र देशों का भी आभार व्यक्त किया।
बयान के मुताबिक, लेक लूसर्न समिट सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण में संपन्न हुई। बर्गेनस्टॉक बैठक इस्लामाबाद एमओयू पर प्रगति की पहली औपचारिक समीक्षा थी। यह समझौता पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षरित किया था, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसके गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए थे।
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