मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों ने एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों, ऊर्जा परियोजनाओं और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी मिसाइल हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की लड़ाई और तेज
शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और उग्र हो गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई पुलों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और सैन्य ढांचों पर हवाई हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण बंदरगाह पर स्थित निगरानी टावर भी हमले में ध्वस्त हो गया। माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की रणनीतिक पकड़ को कमजोर करना है।
ईरान का पलटवार, सहयोगी देशों पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीबी सहयोगी देशों को निशाना बनाया। कतर, कुवैत, बहरीन और अन्य क्षेत्रों की ओर मिसाइलें दागी गईं। कुवैत के एक समुद्री जल शोधन संयंत्र को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है।
युद्धविराम खत्म होने के बाद लगातार बढ़ रहे हमले
अस्थायी युद्धविराम समाप्त होने के बाद क्षेत्र में लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से लगातार सातवीं रात अभियान चलाया गया। वहीं, ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया हमलों में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित
युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। समुद्री गतिविधियां कम होने से वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई हैं।
ट्रंप पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अभियान अमेरिका के पक्ष में आगे बढ़ रहा है और जल्द सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। हालांकि, अमेरिका के भीतर युद्ध को जल्द समाप्त करने और लंबे सैन्य संघर्ष से बचने का राजनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
ईरान के पुलों और बिजली ढांचे को बनाया निशाना
ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी होर्मोजगन प्रांत में कई पुलों और परिवहन मार्गों पर हवाई हमले किए गए। इन हमलों का असर बंदर अब्बास बंदरगाह को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर भी पड़ा। ईरान के ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी इलाकों में बिजली की खपत कम करने की अपील की, हालांकि उसने क्षति का पूरा विवरण साझा नहीं किया।
हमलों में बढ़ा जान-माल का नुकसान
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हुई है जबकि 400 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी कई सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है।
चाबहार बंदरगाह का टावर गिरा
अमेरिकी हवाई हमलों के दौरान ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह का एक अहम टावर भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। यह बंदरगाह क्षेत्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इस टावर का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जबकि ईरान इसे केवल व्यावसायिक जहाजों की निगरानी से जुड़ा ढांचा बताता है।
कतर, बहरीन और कुवैत में बढ़ी सुरक्षा
ईरानी मिसाइल हमलों के बाद कतर में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की गई। एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोकने का दावा किया। कुवैत के जल शोधन संयंत्र को भी नुकसान पहुंचा, जबकि बहरीन और जॉर्डन ने भी संभावित हमलों के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
इराक के कुर्द क्षेत्र में भी गूंजे धमाके
उत्तरी इराक के कुर्द बहुल इलाकों इरबिल और सुलेमानिया में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहा और कुछ हमलों को नाकाम किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में कई लोगों के हताहत होने की खबर है।
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