Vastu Upay: भोजन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। यह केवल भूख मिटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय परंपराओं में भोजन को सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। वास्तु शास्त्र में भोजन करने की जगह और वातावरण को लेकर भी कुछ मान्यताएं बताई गई हैं। आजकल व्यस्त जीवनशैली के कारण कई लोग टीवी देखते हुए बेड पर, दरवाजे के पास या घर की किसी सुविधाजनक जगह पर बैठकर खाना खा लेते हैं। हालांकि, वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार भोजन हमेशा साफ, शांत और व्यवस्थित स्थान पर करना बेहतर माना जाता है। आइए जानते हैं घर में किन जगहों पर बैठकर खाना खाने से बचने की सलाह दी जाती है।
बेड पर बैठकर खाना खाने से बचें
कई लोगों को बिस्तर पर बैठकर खाना खाने की आदत होती है। खासकर टीवी या मोबाइल देखते समय लोग प्लेट लेकर बेड पर ही बैठ जाते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा कहा जाता है कि भोजन करने के लिए बेड का इस्तेमाल करने से घर का सकारात्मक वातावरण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा खाने के टुकड़े बिस्तर पर गिरने से गंदगी और स्वच्छता से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
मुख्य दरवाजे के पास न करें भोजन
घर का मुख्य दरवाजा आने-जाने का प्रमुख स्थान होता है। यहां लगातार लोगों की आवाजाही बनी रहती है। वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार के बिल्कुल पास बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि भोजन करते समय शांत और स्थिर वातावरण होना बेहतर होता है। इसलिए खाना खाने के लिए ऐसी जगह चुनना उचित माना जाता है, जहां बार-बार आवाजाही न हो।
बाथरूम के सामने खाना खाने से बचें
भोजन और स्वच्छता का संबंध बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी भोजन करने की जगह को साफ और सकारात्मक रखने पर जोर दिया जाता है। इसी वजह से बाथरूम के सामने या उसके बिल्कुल पास बैठकर खाना खाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी जगह के बजाय भोजन के लिए साफ-सुथरे और हवादार स्थान का चुनाव करना बेहतर माना जाता है।
टूटे या गंदे बर्तनों में न खाएं खाना
भोजन हमेशा साफ और सही बर्तनों में करना चाहिए। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में टूटे हुए बर्तनों को शुभ नहीं माना जाता। मान्यता के अनुसार टूटे हुए कप, प्लेट, गिलास या कटोरी का इस्तेमाल घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए कोई बर्तन टूट जाए तो उसे नियमित इस्तेमाल से हटा देना बेहतर माना जाता है।
अंधेरे या कम रोशनी वाली जगह पर न खाएं
भोजन करते समय पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार बहुत अंधेरी या कम रोशनी वाली जगह पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। खाने के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर है, जहां पर्याप्त प्राकृतिक या कृत्रिम रोशनी हो। साफ और व्यवस्थित वातावरण में भोजन करना न केवल वास्तु की दृष्टि से बेहतर माना जाता है, बल्कि यह अच्छी आदत भी है।
कहां बैठकर भोजन करना माना जाता है शुभ
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार भोजन के लिए साफ, शांत और व्यवस्थित स्थान का चुनाव करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना शुभ माना जाता है। अगर डाइनिंग टेबल पर खाना खाते हैं तो भी बैठने की दिशा और आसपास के वातावरण का ध्यान रखा जा सकता है। जमीन पर बैठकर भोजन करना भी भारतीय परंपरा में लंबे समय से अपनाई जाने वाली आदत रही है।
वास्तु शास्त्र में भोजन को घर की सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। फिर भी साफ-सफाई, शांत वातावरण और भोजन के प्रति सम्मान जैसी आदतें रोजमर्रा की जिंदगी के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
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