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Washington : अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का दिया आदेश, शी जिनपिंग के मुलाकात से पहले बड़ा कदम

Washington : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली अपनी अहम बैठक से ठीक पहले एक बड़ा फैसला लेते हुए रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब अन्य परमाणु शक्तियों विशेष रूप से रूस और चीन के साथ “समान स्तर” पर आना चाहता है।

ट्रेप ने क्या कहा?

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए मैंने रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि हम भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करें। यह प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से लागू होगी।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि, “फिलहाल रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन आने वाले पांच वर्षों में हम बराबरी पर होंगे।” ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका, रूस और चीन की बढ़ती परमाणु क्षमताओं से चिंतित है।

रूस ने दिखाया परमाणु शक्ति का प्रदर्शन

उधर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में घोषणा की कि उनके देश ने पोसाइडन परमाणु-संचालित सुपर टॉरपीडो का सफल परीक्षण किया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह टॉरपीडो इतना शक्तिशाली है कि यह रेडियोधर्मी समुद्री लहरों को उत्पन्न कर तटीय क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

पुतिन ने हाल के दिनों में परमाणु शक्ति का लगातार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 21 अक्टूबर को बुरेवेस्टनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण और 22 अक्टूबर को परमाणु प्रक्षेपण अभ्यास आयोजित किया था।

1992 के बाद पहली बार टेस्ट की तैयारी

अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु हथियार का परीक्षण किया था। परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि नए हथियार कितने प्रभावी हैं और पुराने हथियार अब भी काम कर रहे हैं या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी है, जिसका सीधा संदेश रूस और चीन को जाएगा।

गौरतलब है कि अमेरिका ने जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के अलामोगोर्डो में पहला परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद उसी वर्ष अगस्त में हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए गए थे। जिसने द्वितीय विश्व युद्ध का अंत किया।

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इस निर्णय के साथ ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका की परमाणु श्रेष्ठता को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शी जिनपिंग के साथ होने वाली ट्रंप की मुलाकात के बाद अमेरिका की परमाणु नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

Shweta Gupta

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