Akshat Manvendra Singh murder: एक दिल दहला देने वाली घटना ने से पूरा लखनऊ शहर हैरान रह गया। यहां एक 21 वर्षीय युवक ने अपने 50 वर्षीय पिता की हत्या कर दी और फिर शव के टुकड़े करके उसे एक नीले ड्रम में छिपाने की कोशिश की। शुरुआत में यह मामला नीट परीक्षा की तैयारी पर दबाव के कारण लग रहा था, लेकिन गहन जांच में सामने आया कि असली वजह कहीं अधिक गहरी और जटिल थी. पारिवारिक व्यवसाय पर कब्जे की चाहत और पुरानी अविश्वास की खाई।
मानवेंद्र प्रताप सिंह जालौन जिले के रहने वाले थे और वह लखनऊ में बस गए थे। उन्होंने पैथोलॉजी लैबों का एक नेटवर्क खड़ा किया था। चार लैब चल ती थीं। साथ ही तीन लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानें भी संचालित कर रहे थे। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत माना जाता था। पत्नी के कुछ साल पहले निधन के बाद मानवेंद्र का पूरा ध्यान अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति पर केंद्रित हो गया था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि बेटा डॉक्टर बने और मेडिकल क्षेत्र में नाम कमाए। अक्षत ने ला मार्टिनियर जैसे प्रतिष्ठित स्कूल से 12वीं पास की और फिर NEET की तैयारी के लिए कोचिंग जॉइन की। लेकिन दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली, जिससे पिता-पुत्र के बीच मतभेद गहराने लगे।
जांच में पता चला कि अक्षत पढ़ाई से ज्यादा परिवार के कारोबार में रुचि रखता था। वह पैथोलॉजी लैब और शराब की दुकानों को संभालने के लिए तैयार महसूस कर रहा था। उसके अनुसार, व्यवसाय पहले से स्थापित था और डॉक्टर बनने में लंबा समय लगता, जबकि वह तुरंत जिम्मेदारी लेना चाहता था। दूसरी ओर, मानवेंद्र का मानना था कि पढ़ाई और प्रोफेशनल डिग्री सबसे पहले जरूरी है। व्यापार तो बाद में भी चल सकता है। यह विचारधारा का टकराव धीरे-धीरे तीव्र बहसों में बदल गया और रिश्तों में खटास आ गई।
करीब चार महीने पहले घर से कीमती गहने चोरी हो गए थे। शुरुआत में शक नौकर पर हुआ और पुलिस में शिकायत भी दर्ज हुई। लेकिन बाद में जांच में अक्षत की भूमिका संदिग्ध नजर आई। मामला इतना बढ़ा नहीं कि मानवेंद्र ने शिकायत वापस ले ली, पर पिता का बेटे पर से भरोसा हमेशा के लिए डगमगा गया। इसके बाद उन्होंने अक्षत की हर हरकत पर सख्त निगरानी रखनी शुरू कर दी, जिससे दोनों के बीच दूरी और बढ़ गई।
20 फरवरी की सुबह पिता-पुत्र के बीच फिर से बातचीत हुई। मानवेंद्र ने अक्षत को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और नीट की तैयारी करने की सलाह दी। परिवार के कुछ सदस्यों के अनुसार, यह सिर्फ परीक्षा की बात नहीं थी। यह महीनों से जमा असंतोष का विस्फोट था।
झगड़े के दौरान अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल से सिर में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना घर की तीसरी मंजिल पर हुई। छोटी बहन कृति अपने कमरे में थी। गोली की आवाज सुनकर वह दौड़ी, लेकिन जो नजारा देखा, वह सदमे में चली गई। अक्षत ने उसे चुप रहने की कड़ी धमकी दी। वह चार दिन तक डर के साये में रही।
हत्या के बाद अक्षत ने शव को नीचे लाया। पहले सोचा गोमती नदी में फेंक देगा, लेकिन शव भारी होने से अकेले नहीं उठा सका। फिर बाजार से आरी लाया और शरीर के अंग काट दिए। कुछ हिस्से सदरौना इलाके में फेंके गए, जबकि धड़ को नीले ड्रम में रख दिया। सिर अभी भी लापता है। पुलिस ने घर से तेजाब भी बरामद किया, जिसका इस्तेमाल शव पर किया गया था।
जब मानवेंद्र लापता दिखे, तो अक्षत ने कहा कि पिता दिल्ली गए हैं और फोन बंद है। लेकिन पूछताछ में बयानों में विरोधाभास आए। कड़ी पूछताछ के बाद उसने जुर्म कबूल लिया। फॉरेंसिक जांच में कार के बूट में खून के निशान, सफाई के प्रयास और अन्य सबूत मिले।
डीसीपी (सेंट्रल) विक्रांत वीर के अनुसार, 21 फरवरी को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। शुरुआत में नीट दबाव को वजह बताया गया, लेकिन परिवार के सदस्यों और जांच से पता चला कि असली कारण पिता का बेटे पर भरोसा खोना, चोरी की घटना और व्यवसाय को लेकर गहरे मतभेद थे। पड़ोसियों ने बताया कि अक्षत अक्सर पिता की बंदूक दिखाता था। मानवेंद्र के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी हैं और छोटा भाई भी पुलिस सेवा में है।
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