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चीन के साथ की गई गलतियों को नहीं दोहराएंगे, भारत के साथ व्यापार समझौते पर ट्रंप के शीर्ष अधिकारी का बड़ा बयान


India US trade deal: क्रिस्टोफर लैंडौ ने गुरुवार को कहा कि भारत के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं में संयुक्त राज्य अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। रायसीना डायलॉग में बोलते हुए अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है, लेकिन कोई भी व्यापार समझौता अमेरिकी नागरिकों के हितों के अनुरूप ही होगा। लैंडौ ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ सहयोग को महत्व देता है, लेकिन वह ऐसे किसी भी समझौते से बचना चाहता है जिससे भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे।

चीन के साथ पिछली गलतियों से सीख

अपने संबोधन में लैंडौ ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ वही गलतियां नहीं दोहराएगा जो दो दशक पहले चीन के साथ व्यापार संबंधों में हुई थीं। उनके अनुसार, उस अनुभव से अमेरिका ने सीखा है कि वैश्विक व्यापार समझौतों में संतुलन और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी नीतियों में अपने नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, ठीक उसी तरह जैसे भारत सरकार अपने नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेती है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी बातचीत

यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडिया और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार ढांचे पर बातचीत जारी है। दोनों देशों का मानना है कि यह समझौता आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। लैंडौ ने बताया कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संभावित समझौते को लेकर काफी उत्साहित है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।

अमेरिका फर्स्ट का मतलब अलगाव नहीं

अमेरिकी विदेश नीति को लेकर उठने वाले सवालों पर लैंडौ ने कहा कि “अमेरिका फर्स्ट” नीति का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका वैश्विक सहयोग से दूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका अन्य देशों के साथ साझेदारी करना होता है। इसलिए अमेरिका उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है जिनके साथ उसके रणनीतिक और आर्थिक हित मेल खाते हैं।

नेताओं का लक्ष्य अपने देश को मजबूत करना

लैंडौ ने कहा कि राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देना हर संप्रभु देश की स्वाभाविक नीति होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को मजबूत बनाने की बात करते हैं, उसी तरह अन्य देशों के नेता भी अपने-अपने देशों की प्रगति को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया और कहा कि दुनिया के सभी नेता अपने देशों को अधिक समृद्ध और प्रभावशाली बनाने का प्रयास करते हैं।

भारत के उभार को लेकर अमेरिका की उम्मीद

लैंडौ ने भारत को 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरते हुए देश के तौर पर वर्णित किया। उनके अनुसार, भारत की जनसंख्या, आर्थिक क्षमता और मानव संसाधन इसे आने वाले दशकों में दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और इसके पास विशाल आर्थिक संभावनाएं मौजूद हैं। यही कारण है कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है।

साझेदारी में विन-विन की संभावना

लैंडौ ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने में कई विन-विन अवसर देखता है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग से न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी बड़े लाभ मिल सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंध इसलिए मजबूत करना चाहता है क्योंकि यह दोनों देशों के हित में है।

व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में कदम

इस वर्ष की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी ने एक अंतरिम व्यापार ढांचे की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही दोनों देशों ने एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है और वैश्विक व्यापार पर भी इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

Yas Pal

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