Yemen Threat Crude Oil Price Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल परिवहन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच यमन की ओर से भी एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर चेतावनी सामने आने की खबरों ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है। किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। तनाव के बीच कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ कंपनियां सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों की गति और मार्ग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।
यमन की चेतावनी से बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में पहले से चल रहे तनाव के बीच यमन से जुड़ी गतिविधियों ने भी चिंता बढ़ाई है। अगर लाल सागर या आसपास के समुद्री रास्तों पर भी संकट गहराता है, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्ग एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
क्या तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष व्यापक रूप लेता है और प्रमुख तेल मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में असामान्य उछाल आ सकता है। कुछ अनुमानों में कीमतों के 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह स्थिति पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि संघर्ष कितना लंबा चलता है और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियां आमतौर पर वैश्विक कीमतों, मुद्रा विनिमय दर और आपूर्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले लेती हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। होर्मुज और अन्य समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा का असर केवल तेल कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी देशों की नजर क्षेत्रीय हालात और कूटनीतिक प्रयासों पर बनी हुई है।
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