Yogini Ekadashi 2026: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है। हालांकि हर वर्ष तिथि को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बन जाती है कि व्रत किस दिन रखा जाए और पारण कब किया जाए। ऐसे में यदि आपके मन में भी यह सवाल है कि आज योगिनी एकादशी का व्रत रखना है या पारण करना है, तो यहां जानिए इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
क्या आज भी है योगिनी एकादशी?
पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी की तिथि का पालन उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। जिन श्रद्धालुओं ने निर्धारित तिथि पर एकादशी व्रत रखा है, उनके लिए अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि-विधान के साथ पारण करने का नियम बताया गया है। वहीं जिन लोगों को तिथि को लेकर भ्रम है, उन्हें अपने क्षेत्र के पंचांग या योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
किन लोगों को रखना चाहिए योगिनी एकादशी का व्रत?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करने वाले श्रद्धालु योगिनी एकादशी का व्रत रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। कई लोग परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति के लिए भी यह व्रत करते हैं।
पारण का क्या है महत्व?
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में पारण के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही समय पर पारण करना उतना ही आवश्यक माना जाता है जितना कि व्रत रखना। पारण निर्धारित समय के भीतर करने से व्रत पूर्ण माना जाता है, जबकि देर से पारण करने से व्रत का पूर्ण फल मिलने में बाधा मानी जाती है।
पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते हैं और विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ भी करते हैं। दिनभर सात्विक आचरण और भगवान के स्मरण का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यता
शास्त्रों में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी एकादशी माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

