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116 साल की उम्र में भी अटूट आस्था, पैदल चढ़कर किए तिरुमला के दर्शन

by | Jul 7, 2026 | Top News

116 Year Old Woman Tirumala: आस्था और संकल्प के सामने उम्र भी छोटी पड़ जाती है। इसका ताजा उदाहरण आंध्र प्रदेश के तिरुमला श्री वेंकटेश्वर मंदिर में देखने को मिला, जहां 116 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए पैदल चढ़ाई पूरी कर सभी को प्रेरित कर दिया। उनकी श्रद्धा और हौसले का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।

पैदल पूरी की तिरुमला की चढ़ाई

जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला ने तिरुपति से तिरुमला तक जाने वाले पैदल मार्ग से यात्रा की। यह रास्ता हजारों सीढ़ियों और कई किलोमीटर की चढ़ाई वाला माना जाता है। आमतौर पर श्रद्धालु इस मार्ग को धार्मिक आस्था के साथ पूरा करते हैं, लेकिन 116 वर्ष की आयु में इस यात्रा को पूरा करना लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बन गया। यात्रा के दौरान उनके साथ परिजन और अन्य श्रद्धालु भी मौजूद रहे। रास्ते में कई लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बुजुर्ग महिला की यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए तिरुमला की ओर जाती दिखाई दे रही हैं। उनकी मुस्कान और भगवान के प्रति अटूट विश्वास ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा है। कई लोगों ने इसे आस्था, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिखा कि जब इच्छा शक्ति मजबूत हो तो उम्र भी रास्ता नहीं रोक सकती।

देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है तिरुमला

आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में भक्त पैदल मार्ग से यात्रा करना पुण्य और श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं।

आस्था और हौसले की बनी मिसाल

116 वर्षीय महिला की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और विश्वास के साथ कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उनकी कहानी ने हजारों लोगों को प्रेरित किया है और यह दिखाया है कि सच्ची श्रद्धा के सामने उम्र की सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।

तिरुमला की पैदल यात्रा पूरी करने वाली 116 वर्षीय महिला ने अपनी अटूट आस्था और अद्भुत हिम्मत से लोगों का दिल जीत लिया। उनका यह प्रयास श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बन गया है और यह साबित करता है कि जब मन में विश्वास हो तो उम्र भी बाधा नहीं बनती।

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