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E20 पेट्रोल पर बढ़ी नाराजगी! सर्वे में माइलेज घटने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने की शिकायत

by | Jul 6, 2026 | Breaking, Cover Story Big

E20 Petrol Survey India: सरकार जहां E20 पेट्रोल को ईंधन आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं एक नए सर्वे में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। लोकलसर्किल्स के इस सर्वे में देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिक शामिल हुए।

53% ने लागू करने के तरीके पर जताई नाराजगी

सर्वे के मुताबिक, 53% लोगों ने सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा E20 पेट्रोल लागू करने की प्रक्रिया को "बेहद खराब" या "असरहीन" बताया। इनमें 42% ने इसे "बेहद खराब" कहा, जबकि केवल 13% ने इस पहल को कुछ हद तक सकारात्मक रेटिंग दी।

पुराने वाहनों पर ज्यादा असर

2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के 66% मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज 10% से अधिक घट गया। वहीं 45% लोगों ने बताया कि वाहन के कई कंपोनेंट्स में दिक्कतें बढ़ी हैं और मरम्मत का खर्च पहले से ज्यादा हो गया है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि विकल्प चाहते हैं। 2023 से पहले बनी गाड़ियों के 31% मालिकों ने कहा कि यदि E0 या E10 पेट्रोल उपलब्ध हो, तो वे अधिक कीमत देकर भी उसे खरीदना पसंद करेंगे।

सरकार और विशेषज्ञों का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों को लाभ मिलेगा। हाल ही में वाहन निर्माताओं के साथ हुई बैठक में भी कंपनियों ने E20 के फायदों का समर्थन किया।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2023 से पहले बनी अधिकांश पेट्रोल गाड़ियां E10 ईंधन के लिए डिजाइन की गई थीं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद के नए मॉडल E20 कम्प्लायंट हैं। ऐसे में पुरानी गाड़ियों को E20 के अनुरूप बनाने के लिए फ्यूल सिस्टम के कुछ हिस्से बदलने पड़ सकते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बलानी के अनुसार, पुरानी BS4 और BS6 कारों के लिए फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट के परीक्षण के सकारात्मक नतीजे मिले हैं। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। फिलहाल आयातित किट की कीमत करीब ₹50,000 है, जबकि देश में निर्माण होने पर इसकी लागत लगभग ₹20,000 हो सकती है। इस किट का परीक्षण मारुति डिजायर पर किया गया था।

सर्वे में 69% पुरुष और 31% महिलाएं शामिल थीं। इनमें 46% प्रतिभागी टियर-1, 32% टियर-2 और 22% टियर-3, टियर-4, टियर-5 व ग्रामीण क्षेत्रों से थे। लोकलसर्किल्स के अनुसार सभी प्रतिभागी उसके प्लेटफॉर्म के पंजीकृत और सत्यापित उपयोगकर्ता थे।

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