बिहार

35 साल बाद फिर चला टी.एन. शेषन का ‘गुप्त आदेश’, अब ऐसे होगी बुर्का-घूंघट में आने वाली वोटर्स की पहचान

Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव और देश के सात राज्यों में होने वाले उपचुनावों में इस बार महिला वोटर्स की पहचान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने 35 साल पुराना नियम फिर से लागू कर दिया है। यह वही आदेश है जो देश के कड़क और ईमानदार मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन ने साल 1994 में जारी किया था। अब एक बार फिर वही “शेषन वाला नियम” महिलाओं की पहचान तय करेगा वो भी उनकी गरिमा और निजता का सम्मान करते हुए।

क्या है “शेषन वाला नियम” ?

चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि मतदान केंद्रों पर बुर्का, नक़ाब, हिजाब या घूंघट में आने वाली महिलाओं की पहचान उनके चेहरे को सार्वजनिक रूप से उजागर किए बिना की जाएगी। इसके लिए हर मतदान केंद्र पर महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी और उनके लिए अलग कतारें और कमरे बनाए जाएंगे, ताकि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया शालीनता और सुरक्षा के माहौल में पूरी हो सके।

संविधान के अनुच्छेद 326 पर आधारित

टी.एन. शेषन का आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 पर आधारित है, जो यह सुनिश्चित करता है कि लोकसभा और विधान सभा के चुनाव “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार” के सिद्धांत पर होंगे। यानी, हर वह भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और किसी कारणवश निरर्हित नहीं है, उसे मतदान का अधिकार प्राप्त है। वहीं, अनुच्छेद 325 यह भी गारंटी देता है कि धर्म, जाति, लिंग या मूलवंश के आधार पर किसी को भी मतदाता सूची से वंचित नहीं किया जा सकता।

पर्दानशीन महिलाओं के वोट डालने में दिक्कतें

शेषन ने 1994 में यह आदेश इसलिए दिया था क्योंकि कुछ इलाकों में पर्दानशीन महिलाओं के वोट डालने में दिक्कतें आती थीं। पहचान के नाम पर सार्वजनिक रूप से चेहरा दिखाने की मजबूरी के कारण कई महिलाएं मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाती थीं। अब आयोग ने फिर स्पष्ट किया है कि किसी भी महिला की पहचान महिला अधिकारी ही सत्यापित करेंगी और उनकी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

महिला मतदाताओं के सम्मान की रक्षा

चुनाव आयोग का यह फैसला न सिर्फ महिला मतदाताओं के सम्मान की रक्षा करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि देश की हर महिला चाहे वह बुर्के में हो या घूंघट में लोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व में बराबरी से हिस्सा ले सके। अब देखना यह होगा कि क्या “शेषन वाला हुक्म” इस बार बिहार और बाकी राज्यों में महिला वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में कामयाब होता है या नहीं। लोकतंत्र के इस नए अध्याय में पर्दे के पीछे से निकलकर महिलाओं की मजबूत आवाज गूंजने को तैयार है।

ये भी पढ़े: – India Oil : भारत बंद करेगा रूस से तेल खरीद? ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप, लेकिन सच्चाई है अलग

Shagun Chaurasia

Recent Posts

IIT बॉम्बे छात्र की मौत के बाद माता-पिता का अनशन, ‘प्रताड़ित करने वालों’ पर कार्रवाई की मांग

IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…

9 hours ago

‘वोट चोरी’ से होती है ‘कानून चोरी’: राहुल गांधी बोले- सांसदों के बनाए कानून भी अवैध

Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…

10 hours ago

AI की रफ्तार बढ़ी तो बढ़ेगा ई-कचरा, 2050 तक हर साल 6.1 करोड़ टन तक निकल सकता है वेस्ट

AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…

11 hours ago

मेरठ सेंट्रल मार्केट के 650 व्यापारियों को राहत, सरकार लाएगी विशेष पुनर्वास नीति

Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…

11 hours ago

गोवा में वोटर डिलीट करने के बाद नाम नहीं हो सका बहाल; EC ने Form 7 का दिया हवाला

ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…

11 hours ago

‘देशभर में होगा प्रदर्शन’: CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में की इस्तीफे की मांग

CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…

12 hours ago