दुनिया

9/11 terror attack: रहस्यों से लेकर सच्चाई तक, चौंकाने वाले तथ्य, जिनसे अब तक अनजान है दुनिया!

9/11 terror attack: 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर अब तक का सबसे बड़ा हमला हुआ। आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया और उनमें से दो को न्यूयॉर्क की वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ट्विन टावर्स से टकरा दिया। दोनों 110 मंज़िला इमारतें सिर्फ दो घंटे में ढह गईं।

इस हमले में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई। इनमें 343 फायरफाइटर, 72 पुलिसकर्मी और 55 सैन्य अधिकारी शामिल थे। साथ ही 90 से ज्यादा देशों के नागरिक भी मारे गए। तीसरा विमान वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथा विमान यात्रियों के संघर्ष की वजह से अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका और पेंसिल्वेनिया के खेत में गिरा दिया गया।

आसमान खाली हुआ

हमले के तुरंत बाद अमेरिकी सरकार ने सभी विमानों को जमीन पर उतारने का आदेश दिया। 4,500 से ज्यादा विमान तुरंत लैंड कराए गए। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब पूरे अमेरिका का आसमान खाली हो गया।

फ्लाइट 93 के हीरो

यूनाइटेड फ्लाइट 93 को भी आतंकियों ने हाईजैक कर लिया था। लेकिन यात्रियों को फोन से पता चला कि दूसरे विमान न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में टकरा चुके हैं। उन्होंने समझ लिया कि उनका भी अंजाम वैसा ही होगा। यात्रियों ने मिलकर आतंकियों का सामना करने का फैसला किया।

थॉमस बर्नेट जूनियर ने अपनी पत्नी से कहा – “हम मरने वाले हैं, लेकिन हम कुछ करेंगे।” टॉड बीमर ने कहा – “क्या सब तैयार हैं? चलो, आगे बढ़ते हैं।”

एयर होस्टेस सैंडी ब्रैडशॉ ने गरम पानी तैयार किया और अपने पति को आखिरी बार फोन पर कहा – “मुझे जाना होगा। अलविदा।”

यात्रियों ने कॉकपिट तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन आतंकियों ने विमान को खेत में गिरा दिया। इसमें 44 लोगों की मौत हुई, लेकिन हजारों लोगों की जान बच गई।

पहले भी हुआ था हमला

1993 में भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था। उस समय एक ट्रक बम धमाके में 6 लोगों की मौत और 1,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

टावरों के भीतर की ज़िंदगी

सामान्य दिनों में ट्विन टावर्स में 50,000 लोग काम करते थे और रोज़ाना 40,000 लोग यहां आते-जाते थे। अगर हमला दिन में देर से होता, तो मौतों की संख्या और ज्यादा होती। मलबे से 18 लोगों को जिंदा निकाला गया, जो किसी चमत्कार से कम नहीं था।

9 महीने तक चला मलबा हटाने का काम

ग्राउंड ज़ीरो से मलबा हटाने में 9 महीने लगे। करीब 18 लाख टन मलबा हटाया गया। इस दौरान बचाव दल और स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया।

सेहत और मानसिक असर

हमले के बाद कई लोगों को दमा और फेफड़ों की बीमारी हो गई, क्योंकि वे जहरीली धूल में सांस ले रहे थे। बहुत से लोग आज भी तनाव और डर (PTSD) से जूझ रहे हैं। 2019 में अमेरिकी संसद ने एक कानून पास किया, जिससे पीड़ितों और बचावकर्मियों को हमेशा आर्थिक मदद मिलती रहेगी।

दुनिया पर असर

यह हमला सिर्फ अमेरिका पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर असर डाल गया। हवाई यात्रा, अंतरराष्ट्रीय रिश्ते, खुफिया एजेंसियों का काम और आतंकवाद के खिलाफ जंग सब बदल गए। आज भी ट्विन टावर्स के ढहने की तस्वीरें लोगों के दिमाग में ताज़ा हैं। लेकिन उन तस्वीरों के पीछे की मानवीय कहानियां इस त्रासदी की असली गहराई दिखाती हैं।

Kajal Sharma

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