लेंसकार्ट की नई गाइडलाइन ने दिया बड़ा संदेश
Lenskart New Style Guideline: आईवियर रिटेल कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) इन दिनों बिंदी और तिलक को लेकर छिड़े विवाद के कारण चर्चा में रही। सोशल मीडिया पर एक पुराने आंतरिक दस्तावेज के वायरल होने के बाद कंपनी पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर सवाल उठे, लेकिन अब कंपनी ने साफ और सार्वजनिक जवाब देकर स्थिति को पलटने की कोशिश की है।
18 अप्रैल को जारी आधिकारिक बयान में लेंसकार्ट ने अपने स्टोर कर्मचारियों के लिए नई और मानकीकृत इन-स्टोर स्टाइल गाइड पेश की। इस गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ काम कर सकते हैं। कंपनी ने कहा कि ये प्रतीक किसी अपवाद के रूप में नहीं, बल्कि उसकी पहचान का अहम हिस्सा हैं। भारतभर में फैले 2400 से अधिक स्टोर्स में काम करने वाले कर्मचारी अपनी आस्था और परंपराओं के साथ काम करते हैं और यही विविधता कंपनी की ताकत है।
लेंसकार्ट ने अपने बयान में माना कि हाल के दिनों में ग्राहकों और समुदाय की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिन्हें गंभीरता से लिया गया। कंपनी ने कहा, “हमने आपकी बात खुलकर और ईमानदारी से सुनी है, और इसी के तहत हम अपनी गाइडलाइन को पारदर्शी रूप से साझा कर रहे हैं।”
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि एक पुराने आंतरिक प्रशिक्षण दस्तावेज की वजह से कर्मचारियों को गलत संदेश गया। इस पर लेंसकार्ट ने गहरा खेद जताते हुए कहा कि अगर किसी को लगा कि उनकी धार्मिक पहचान का सम्मान नहीं किया जा रहा, तो यह कंपनी की मूल सोच नहीं है।
इस पूरे विवाद पर कंपनी के सह-संस्थापक और CEO पीयूष बंसल ने 16 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल दस्तावेज कंपनी की एचआर पॉलिसी नहीं, बल्कि एक पुराना ट्रेनिंग मटेरियल था। उन्होंने माना कि उसमें बिंदी और तिलक को लेकर लिखी गई एक पंक्ति गलत थी और उसे कभी शामिल नहीं किया जाना चाहिए था। बंसल ने बताया कि 17 फरवरी 2026 को इस गलती की जानकारी मिलते ही दस्तावेज को हटा दिया गया था।
साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की गलती को पहले पकड़ लेना चाहिए था। उन्होंने कहा, “सीईओ होने के नाते इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी है,” और भविष्य में सभी कंटेंट की सख्त समीक्षा का आश्वासन दिया।
पेयुष बंसल ने साफ शब्दों में कहा कि कंपनी कभी भी सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाएगी। कर्मचारियों को अपने विश्वास और पहचान को गर्व के साथ व्यक्त करने की पूरी आजादी है और यह नीति आगे भी जारी रहेगी।
लेंसकार्ट ने भरोसा दिलाया है कि अब हर नीति, ट्रेनिंग मटेरियल और आधिकारिक संचार में इन मूल्यों को शामिल किया जाएगा। साथ ही समय-समय पर समीक्षा कर सुधार करने की भी बात कही गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। कुल मिलाकर, विवाद के बीच लेंसकार्ट ने न सिर्फ अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की कि कार्यस्थल पर विविधता और आस्था का सम्मान उसकी पहचान का हिस्सा है, न कि अपवाद।
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