पाकिस्तान की सेना ने कहा है कि अफगानिस्तान से सटी सीमा पर चलाए गए अभियानों में कम से कम 70 आतंकवादियों को मार गिराया गया। अधिकारियों के अनुसार, ये हमले उन कथित ठिकानों पर किए गए जिन्हें हाल के आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार बताया गया है। बाद में सरकारी मीडिया ने मृतकों की संख्या बढ़ाकर 80 बताई, हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई सबूत पेश नहीं किया गया। उप गृह मंत्री तलल चौधरी ने कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी और इसका उद्देश्य सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क को खत्म करना था।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। अफगान प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के भीतर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। उनके मुताबिक इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग मारे गए और घायल हुए।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि धार्मिक मदरसे और रिहायशी मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिसे उसने देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र का उल्लंघन बताया। नंगरहार में अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के एक अधिकारी ने 18 लोगों की मौत और कई के घायल होने की पुष्टि की। काबुल स्थित पाकिस्तानी राजदूत को तलब करते हुए अफगान विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई के परिणामों की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर होगी।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि सेना ने पाकिस्तान-अफगान सीमा पर सात शिविरों के खिलाफ “चुनिंदा और लक्षित अभियान” चलाया। उनके अनुसार, इन ठिकानों का संबंध तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उसके सहयोगियों से था।
तरार ने यह भी दावा किया कि इस महीने इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले समेत हालिया हिंसक घटनाओं के पीछे अफगानिस्तान में बैठे संचालकों का हाथ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास इसके “पुख्ता प्रमाण” हैं, हालांकि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया।
हाल के महीनों में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में तेजी देखी गई है। उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा और सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। बन्नू और बाजौर जैसे इलाकों में हुए आत्मघाती हमलों में कई सैनिक मारे गए।
इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी पाकिस्तान ने अफगान सीमा के भीतर कार्रवाई की थी, जिस पर काबुल ने नागरिक हताहतों का आरोप लगाया था। बाद में कतर की मध्यस्थता से अस्थायी युद्धविराम हुआ, लेकिन नवंबर में इस्तांबुल में हुई वार्ताएं किसी औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।
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