RAHUL VS AKHILESH
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद इंडिया ब्लॉक के अंदर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने मांग की है कि अब वक्त आ गया है कि अखिलेश यादव इसकी कमान संभाल लें। केंद्र में विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक का कोई अकेला औपचारिक नेता नहीं है, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बाय डिफॉल्ट इसका अगुवा समझा जाता है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले उन्हीं की अगुवाई में विपक्ष ने वहां SIR के खिलाफ 'वोटर अधिकार यात्रा' भी निकाली थी, जिसमें देश भर से गठबंधन के नेता शामिल हुए थे।
लखनऊ सेंट्रल से समाजवादी पार्टी एमएलए रविदास मेहरोत्रा ने कहा है कि बिहार में 'इंडिया अलायंस' की सरकार बनती, अगर बैलट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाते। उनका कहना है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बैलेट पेपर की वापसी की लगातार मांग की है और ईवीएम वाले सिस्टम पर सवाल भी उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह बी दावा किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम है।
सपा विधायक ने कहा, 'अखिलेश यादव जी को इंडिया अलायंस की अगुवाई करनी चाहिए। समाजवादी पार्टी अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में सक्षम है।' बिहार चुनाव में कांग्रेस जैसे बुरी तरह से हारी है, उसे देखते हुए सपा नेता की यह टिप्पणी बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है। 2020 में जहां देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने बिहार में 19 सीटें जीती थीं, इस बार वह सिमट कर सिर्फ 6 सीटों पर रह गई है। यह तब हुआ है, जब राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे नेताओं ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक रखी थी।
बिहार चुनाव में इंडिया ब्लॉक की एक और सहयोगी और प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी मात्र 25 सीटों पर ही सिमट गई और 2020 की तुलना में उसकी सीटों की संख्या में 50 की कमी आ गई है। जबकि, बिहार में महागठबंधन की सीटें सिमटकर मात्र 35 पर आ गई है। वहीं केंद्र और बिहार में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए ने अप्रत्याशित जीत दर्ज करते हुए राज्य की 243 में से 202 सीटों पर जीत दर्ज की।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीती थी, उसके बाद से एक के बाद एक जितने भी राज्यों में चुनाव हुए, एक प्रदेश छोड़कर कांग्रेस की बहुत ही ज्यादा फजीहत हुई है। लोकसभा चुनावों में हरियाणा और महाराष्ट्र में अच्छे प्रदर्शन के बाद भी, बाद में हुए विधानसभा चुनावों में इंडिया ब्लॉक की बुरी हार हुई। यह सिलसिला दिल्ली और बिहार में भी जारी रहा और सिर्फ झारखंड में ही विपक्षी गठबंधन की सरकार दोबारा सत्ता में वापस आ सकी। इससे पहले इंडिया ब्लॉक की टीएमसी और नेशनल कांफ्रेंस जैसे सहयोगियों से भी इसी तरह की मांगें उठ चुकी हैं कि नेतृत्व बदला जाना चाहिए। यहां तक कि आरजेडी चीफ लालू यादव भी इंडिया ब्लॉक की अगुवाई के लिए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के नाम का समर्थन कर चुके हैं।
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