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टूटी कुर्सियां, बिखरी प्लेट…नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बेकाबू हुए कार्यकर्ता, जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़

Bihar politics news: बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मची हुई है। जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यालय में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की, क्योंकि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और इस पद से इस्तीफा देने की योजना का विरोध कर रहे थे। इस दौरान कार्यालय परिसर में थालियों के टूटने और फर्नीचर गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तैयारी

यह घटनाक्रम नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की निर्धारित तिथि से ठीक पहले हुआ। इसे उनके मुख्यमंत्री के रूप में रिकॉर्ड 10वें कार्यकाल की शपथ लेने के चार महीने बाद देखा जा रहा है। राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा में सीट ग्रहण करते हैं और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो बिहार में उनकी जगह कौन लेगा, इस पर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।

पार्टी समर्थकों का विरोध

कार्यकारी कार्यालय के बाहर जेडीयू समर्थक जमा हुए और नारेबाजी के साथ संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री पद छोड़ना पार्टी और जनता के हित के खिलाफ है। पिछले लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वे संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानमंडल में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।

उत्तराधिकारी पर अटकलें

हालांकि जनता दल (यूनाइटेड) ने अभी तक किसी उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार में एनडीए सरकार की अगुवाई भाजपा नेता के हाथों जाने की संभावना के रूप में देख रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि जेडीयू का यह कदम राज्य में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

नीतीश कुमार के राज्यसभा में प्रवेश की खबर पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सत्ताधारी गठबंधन पर हमला करते हुए कांग्रेस ने इसे "नेतृत्व तख्तापलट" और जनता के जनादेश के खिलाफ करार दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दी गई चेतावनियां अब सच साबित हो गई हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट में लिखा कि यह जी2 द्वारा रची गई एक नेतृत्व क्रांति और सत्ता परिवर्तन की साजिश है, जो जनता के विश्वास के साथ धोखा है।

राजनीतिक माहौल में तनाव

नीतीश कुमार के इस कदम से बिहार में राजनीतिक माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया है। उनके समर्थक इसे पार्टी की रणनीति और सत्ता के संतुलन के नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। इस बीच पार्टी और राज्य दोनों ही स्तरों पर हलचल बनी हुई है।

भविष्य की संभावना

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा बदल सकता है और यह कदम राज्य की सियासत में नए समीकरण खड़े कर सकता है। साथ ही, इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जनता दल (यूनाइटेड) के अंदर भी सत्ता परिवर्तन को लेकर मतभेद मौजूद हैं।

Yas Pal

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