Ashadha Amavasya 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ अमावस्या पितरों के स्मरण, तर्पण, स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पितृ कर्म और दान से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026 को शाम 6:50 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या का व्रत, स्नान, दान और पितृ तर्पण किया जाएगा।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें। यदि संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। इसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और चंदन डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। फिर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल, कुश और पुष्प से पितरों का तर्पण करें। अपनी श्रद्धानुसार ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, फल या छाता दान करें। शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना गया है।
आषाढ़ अमावस्या पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित कर पूजा करें और तिल के तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें। काले तिल से तर्पण करें तथा संभव हो तो पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी करें। इसके बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र और फल दान दें, गाय को हरा चारा खिलाएं तथा शिव मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर पितरों के कल्याण की प्रार्थना करें।
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