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भारत सीमा पर बढ़ा तनाव, जानिए कितनी बड़ी फोर्स है बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड

हाल के दिनों में सीमा पर बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड यानी BGB की आक्रामक गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हुई है। कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर BGB के पास ऐसी कितनी ताकत है, जो वह भारत जैसे बड़े और सैन्य रूप से मजबूत देश के सामने सख्त रुख दिखाने की कोशिश करती है। दरअसल सीमा पर होने वाली हर गतिविधि सिर्फ सैनिक ताकत का मामला नहीं होती, बल्कि उसके पीछे राजनीतिक संदेश, रणनीतिक दबाव और घरेलू परिस्थितियां भी जुड़ी होती हैं। BGB की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह बल कितना बड़ा है, इसकी जिम्मेदारियां क्या हैं और भारत के सीमा सुरक्षा बल के मुकाबले इसकी स्थिति कैसी है।

BGB यानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश, बांग्लादेश का प्रमुख सीमा सुरक्षा बल है। पहले इसे बांग्लादेश राइफल्स यानी BDR के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका पुनर्गठन कर नया ढांचा तैयार किया गया। इसका मुख्य काम भारत और म्यांमार से लगती सीमाओं की निगरानी करना, अवैध घुसपैठ रोकना, तस्करी पर नियंत्रण रखना और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखना है। बांग्लादेश की सरकार इस बल को सिर्फ सीमा सुरक्षा एजेंसी के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के अहम हिस्से के तौर पर देखती है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में BGB को आधुनिक हथियार, निगरानी उपकरण और बेहतर ट्रेनिंग देने पर लगातार काम किया गया है।

कितनी बड़ी है BGB की ताकत

अगर संख्या की बात करें तो BGB में हजारों जवान तैनात हैं और यह बांग्लादेश के सबसे संगठित सुरक्षा बलों में गिना जाता है। सीमा पर इसकी कई बटालियन सक्रिय रहती हैं, जो अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा लगभग 4 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी है और यह दुनिया की सबसे व्यस्त और संवेदनशील सीमाओं में मानी जाती है। इतनी लंबी सीमा की निगरानी के लिए BGB लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। हालांकि सैन्य शक्ति और संसाधनों के मामले में BGB की तुलना भारत की BSF या भारतीय सेना से नहीं की जा सकती। भारत के पास कहीं अधिक आधुनिक तकनीक, बड़ा रक्षा ढांचा और विशाल सैन्य क्षमता मौजूद है। इसके बावजूद सीमा पर छोटी-छोटी घटनाओं में BGB कई बार आक्रामक रवैया अपनाता दिखाई देता है, क्योंकि सीमा सुरक्षा बलों का काम अपने देश की सीमाओं पर सख्त उपस्थिति दिखाना भी होता है।

सीमा पर तनाव क्यों बढ़ता है

भारत और बांग्लादेश की सीमा बेहद जटिल मानी जाती है। कई इलाकों में गांव, खेत और आबादी सीमा के बेहद करीब स्थित हैं। ऐसे में घुसपैठ, तस्करी, अवैध व्यापार और सीमा पार अपराध अक्सर तनाव की वजह बन जाते हैं। कई बार स्थानीय स्तर की घटनाएं भी दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच टकराव का कारण बन जाती हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति भी कई बार सीमा पर दिखने वाले रवैये को प्रभावित करती है। घरेलू दबाव या राष्ट्रवादी राजनीति के दौरान सीमा पर सख्त रुख दिखाना सरकारों के लिए राजनीतिक संदेश देने का तरीका बन जाता है। यही कारण है कि कुछ मौकों पर BGB का रवैया सामान्य से अधिक आक्रामक नजर आता है।

भारत की BSF के मुकाबले BGB की स्थिति

भारत की सीमा सुरक्षा बल यानी BSF दुनिया के सबसे बड़े और अनुभवी सीमा सुरक्षा बलों में गिनी जाती है। BSF के पास अत्याधुनिक निगरानी तकनीक, ड्रोन, हाईटेक हथियार और व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था है। भारत की सुरक्षा रणनीति सिर्फ सीमा रक्षा तक सीमित नहीं बल्कि बड़े स्तर की सैन्य तैयारी का हिस्सा होती है। इसके मुकाबले BGB का दायरा और संसाधन सीमित हैं। लेकिन सीमा सुरक्षा में स्थानीय जानकारी, इलाके की समझ और तेज प्रतिक्रिया भी अहम भूमिका निभाती है। BGB इन्हीं पहलुओं के आधार पर अपनी मौजूदगी मजबूत दिखाने की कोशिश करता है। हालांकि किसी भी बड़े सैन्य मुकाबले की स्थिति में दोनों देशों की ताकत का अंतर साफ नजर आएगा।

दोनों देशों के रिश्तों पर क्या पड़ता है असर

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, जल समझौते और सुरक्षा सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मजबूत साझेदारी रही है। ऐसे में सीमा पर होने वाली घटनाएं दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकती हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में दोनों सरकारें तनाव को बढ़ने से रोकने की कोशिश करती हैं। सीमा पर फ्लैग मीटिंग, संयुक्त वार्ता और वरिष्ठ अधिकारियों के संवाद के जरिए हालात को सामान्य बनाने का प्रयास किया जाता है। दोनों देशों को यह अच्छी तरह समझ है कि सीमा पर स्थिरता बनाए रखना क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के लिए बेहद जरूरी है

बांग्लादेश की BGB एक संगठित और सक्रिय सीमा सुरक्षा बल जरूर है, लेकिन उसकी ताकत को भारत की सैन्य क्षमता के बराबर नहीं माना जा सकता। सीमा पर उसका सख्त रवैया अधिकतर रणनीतिक और राजनीतिक संदेश का हिस्सा होता है। भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए यह जरूरी है कि सीमा विवाद या तनाव को बातचीत और सहयोग के जरिए संभाला जाए, क्योंकि स्थिर सीमा ही दोनों देशों के बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।

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Lavanya Dayal

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