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बंगाल में बीजेपी इतिहास रचने की ओर; जाएगी ममता बनर्जी की CM कुर्सी

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बाजी मार ली और अब राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। सोमवार को 293 सीटों पर वोटों की गिनती के शुरुआती रुझानों में बीजेपी ने टीएमसी को कड़ी टक्कर दी और आखिर में बहुमत के 148 सीटों के जादुई आंकड़े को पार कर लिया जबकि टीएमसी 2 डिजीट पर सिमट गई। पिछली चुनावों में टीएमसी को 213 और बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली थी। आइये जानते हैं इस चुनाव के वो फैक्टर्स, जिनसे बीजेपी को पहुंचा फायदा।

TMC पर भारी पड़ा ‘बाहरी वाला नैरेटिव’

पूरे चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने बीजेपी पर बाहरी लोगों की पार्टी होने का आरोप लगाया। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे पर बार-बार यही तंज कसा की ये बाहरी हैं और चुनाव बाद दिल्ली लौट जाएंगे। साथ कहा कि बीजेपी यहां के लोगों की खाने की आदत भी बदल देगी। लेकिन बीजेपी ने टीएमसी के बाहरी वाले नैरेटिव तो तोड़ ढूंढ निकाला। बीजेपी ने समिक भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर स्थानीय लोगों के बीच अहम मेसेज दिया। दरअसल, समिक भट्टाचार्य लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के समय बीजेपी में हैं और बंगाल में स्थानीय मुद्दों से वाकिफ हैं। भट्टाचार्य ने टीएमसी के ‘खाने वाले बयान’ पर अपनी पार्टी का स्टैंड रखा और इस बात पर जोर दिया कि बंगाल में मछली और मांस का सेवन जारी रहेगा।  

मेरा बूथ, सबसे मजबूत

पीएम नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को नमो ऐप के जरिए बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' संवाद किया। इसका मकसद साफ था चुनाव के लिए पार्टी की जमीन तैयार करना। इस काम को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बखूबी निभाया। उन्होंने बूथ लेवल नेटवर्क मजबूत किया। बीजेपी ने अपने पोलिंग एजेंट्स चुनने के लिए मौखिक और लिखित परीक्षाएं भी आयोजित कीं। इसके अलावा बीजेपी ने पिछले छह महीनों में 2 बातों पर खास ध्यान दिया- एक जमीनी नेटवर्क तैयार किया और दूसरा ग्रामीण इलाकों में ‘डर के माहौल’ का मुकाबला करने और वोटर बूथ तक पहुंचे। चुनाव में यही वे कारण रहे जो ना सिर्फ वोट करवाया बल्कि उसे अपने पक्ष में ले जाने में सफल रहे।

2 चरणों में वोटिंग करने का फैसला

चुनाव आयोग ने इस बार बंगाल में चुनाव 2 चरणों में कराने का फैसला किया। नतीजा रहा कि इस बार के चुनाव में सबसे कम हिंसा रही है। आपको बता दें कि पिछला चुनाव 8 चरणों में हुआ था। राजनैतिक तनाव के चलते कई हिंसा की घटनाएं बड़े पैमाने पर हुईं। जिनमें 60 से ज्यादा मौतें हुई थी। लेकिन इस बार 2 चरणों में वोटिंग होने हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने। वोटरों में भय कम रहने से लोग घरों से बाहर निकले और जबर्दस्त वोटिंग की। नतीजा रहा कि दोनों चरणों में कुल मिलाकर 91 प्रतिशत से ज्यादा की वोटिंग हुई। यहां उन वोटरों का फायदा बीजेपी को मिला जो बूथ तक नहीं पहुंच पाते थे। चुनाव को शांतिपूर्वक करवाने के लिए 2.40 लाख पैरा मिलिट्री के जवान तैनात रहे।

चुनाव में SIR रहा बड़ा मुद्दा

एसआईआर की प्रक्रिया के तहत वोटिंग लिस्ट से सबसे ज्यादा नाम पश्चिम बंगाल में काटे गए। बीजेपी ने बार-बार आरोप लगाया कि बांग्लादेशी मुस्लमानों के वोट टीएमसी को जाता है। यही वजह है कि वह एसआईआर के खिलाफ है। प्रदेश में आखिरकार एसआईआर के जरिए 90 लाख से ज्यादा ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए जो चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक वैध दस्तावेज दिखा नहीं पाए। बताया जाता है कि अब तक यही वोटर टीएमसी की जीत में अहम भूमिका निभा रहे थे। टीएमसी और ममता बनर्जी ने एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गई थी लेकिन उसने इस प्रक्रिया को जरूरी और वैध बताया। ममता बनर्जी ने प्रदेश में एसआईआर का डर दिखाने की कोशिश की लेकिन बंगाल के मूल वोटरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

बीजेपी ने मतगणना के रुझानों में 190 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर यह संकेत दे दिया है कि वह उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम समेत देश के हर हिस्से में सरकार बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी है। यही खासियत उसे विश्व की सबसे पार्टी बनाती है। बंगाल में कभी 34 सालों तक लेफ्ट यानी सीपीएम ने शासन किया उसके बाद 2011 में ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार बनी और उसने 15 सालों तक शासन किया और अब प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री का चेहरा सुवेंदु अधिकारी हो या कोई अन्य उम्मीदवार लेकिन प्रदेश में बीजेपी के सामने बड़ी चुनौतियां रहेंगी। सरकार गठन के बाद से बीजेपी अपने घोषणापत्र को अमल करना चाहेगी।

Sunil Gupta

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