तमिलनाडु में 52 साल बाद नया युग शुरू!
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल रहा है। करीब 52 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज द्रविड़ दलों का वर्चस्व अब चुनौती के घेरे में नजर आ रहा है। 1967 के बाद से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच चली आ रही सीधी टक्कर अब नई दिशा लेती दिख रही है।
द्रविड़ राजनीति की शुरुआत 1967 में हुई, जब DMK ने कांग्रेस को सत्ता से हटाकर राज्य में अपनी पकड़ बनाई। इसके बाद तमिलनाडु की सियासत लगभग पूरी तरह दो ध्रुवों DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही। इस दौर में एम. करुणानिधि, एम. जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे करिश्माई नेताओं ने राजनीति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
लेकिन 2026 के विधानसभा चुनावों में तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने इस पारंपरिक समीकरण को चुनौती दी है। शुरुआती रुझानों में TVK का उभार यह संकेत दे रहा है कि राज्य अब द्विध्रुवीय राजनीति से आगे बढ़कर बहुध्रुवीय दौर में प्रवेश कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुराने दिग्गज नेताओं के दौर के बाद जनता अब नए नेतृत्व की तलाश में है। विजय ने युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले वर्ग को आकर्षित कर इस बदलाव को हवा दी है। उनकी सभाओं में उमड़ी भीड़ और सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थन अब वोटों में बदलता दिख रहा है।
इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती मौजूदगी ने भी राजनीतिक समीकरण को और जटिल बना दिया है। DMK और AIADMK का पारंपरिक वर्चस्व अब पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। तमिलनाडु की राजनीति, जो कभी स्थिर और पूर्वानुमेय मानी जाती थी, अब तेजी से बदल रही है।
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