Boh Valley Disaster Relief: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बोह घाटी में बादल फटने से प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्वास का काम तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और राहत कार्यों में जुटी एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिले।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन परिवारों के मकान आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें नया घर बनाने के लिए 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी घरेलू सामान खरीदने के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की जमीन भी आपदा में प्रभावित हो गई है और उनके पास घर बनाने के लिए भूमि नहीं बची है, उन्हें आवश्यकता के अनुसार सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने पशुपालकों और किसानों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणा की है। आपदा में गाय या भैंस की मौत होने पर 55 हजार रुपये प्रति पशु, जबकि बकरी की मौत पर 15 हजार रुपये प्रति बकरी की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा जिन किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं, उन्हें 5 हजार रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आधार पर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का भी फैसला किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन परिवारों को फिलहाल किराये के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें 5 हजार रुपये प्रतिमाह किराया सरकार की ओर से दिया जाएगा। साथ ही प्रभावित परिवारों को छह महीने तक मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए रिड़कमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने की भी घोषणा की गई है।
सरकार ने तत्काल राहत के तौर पर 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये और 16 परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता जारी की है। प्रशासन अब तक 13 राजस्व प्रमाणपत्र तैयार कर चुका है और प्रभावित लोगों को बोनाफाइड प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे हैं। जिन छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेज आपदा में नष्ट हो गए हैं, उनके प्रमाणपत्र दोबारा बनवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए सुरक्षित भूमि की पहचान की जा रही है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पैड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
बोह घाटी में आई प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल सरकार ने राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए व्यापक सहायता पैकेज की घोषणा की है। घर, जमीन, पशुधन, फसल, दुकान और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ पुनर्वास की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन और राहत एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से प्रभावित परिवारों को जल्द राहत पहुंचाने का काम लगातार जारी है।
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