Bombay High Court: मुंबई में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रम प्रभावी और तेजी से लागू करने की सलाह दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कार्यक्रम को आक्रामक तरीके से लागू करने पर आवारा कुत्तों की आबादी की आगे होने वाली बढ़ोतरी रोकी जा सकती है। अदालत ने कहा कि जिस कुत्ते की नसबंदी हो जाती है, उससे नए कुत्तों का जन्म नहीं होगा। इसलिए सबसे पहले वयस्क कुत्तों की नसबंदी कर आबादी बढ़ने की प्रक्रिया रोकना जरूरी है।
आबादी रुकी तो बाकी समस्याओं पर होगा फोकस
हाईकोर्ट के मुताबिक, कुत्तों की संख्या बढ़ना बंद होने के बाद प्रशासन के लिए बचे हुए कुत्तों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना आसान होगा। इनमें रेबीज नियंत्रण और कुत्तों को खिलाने जैसे विषय शामिल हैं। अदालत ने कहा कि केवल मौजूदा आबादी को संभालना पर्याप्त नहीं है; लगातार होने वाले नए जन्म को रोकना समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हो रही सुनवाई
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2025 के फैसले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई स्वत: संज्ञान याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा होने की स्थिति में राज्य सरकारें निष्क्रिय दर्शक नहीं बनी रह सकतीं और हाईकोर्ट को अनुपालन की निगरानी का निर्देश दिया था। इसी क्रम में बॉम्बे HC महाराष्ट्र सरकार के कदमों और ABC कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा कर रहा है। हाईकोर्ट ने राज्य से अब तक की कार्रवाई और कार्यक्रम के अनुपालन की जानकारी मांगी है।
11 सितंबर को अगली सुनवाई
अदालत का मुख्य जोर आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ने से रोकने पर है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जिसमें महाराष्ट्र सरकार की अनुपालन रिपोर्ट और ABC कार्यक्रम के तहत उठाए गए कदमों पर विचार किया जाएगा।
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