Boris Johnson Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चिंता जताई है। जॉनसन ने ब्रिटिश अखबार डेली मेल में लिखे एक लेख में इमरान खान की जेल की स्थिति, उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों और पाकिस्तान की राजनीति पर अपनी बात रखी। उन्होंने ब्रिटेन से अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इमरान खान की रिहाई के लिए प्रयास करने की अपील की है।
बोरिस जॉनसन ने अपने लेख में दावा किया कि इमरान खान को पाकिस्तान की एक छोटी जेल सेल में रखा गया है। उनके मुताबिक, सेल करीब 6x8 फीट की है और इसमें शौचालय भी शामिल है। उन्होंने दावा किया कि वहां खिड़की नहीं है और इमरान को लंबे समय तक अकेले रहने के साथ-साथ व्यायाम, किताबों और अखबारों जैसी सुविधाओं तक सीमित पहुंच मिलती है। जॉनसन ने इमरान खान की सेहत को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा मिलने को लेकर सवाल हैं। हालांकि, ये दावे जॉनसन के लेख में किए गए हैं और पाकिस्तान सरकार ने इससे पहले जेल में दुर्व्यवहार या सुविधाओं से वंचित किए जाने के आरोपों को खारिज किया है।
बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन से पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों और प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की है। उनका कहना है कि ब्रिटिश सरकार को इमरान खान की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और उनकी रिहाई के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर तत्काल रिहाई संभव नहीं है तो अपील की सुनवाई स्वतंत्र अदालत में जल्द होनी चाहिए।
अपने लेख में जॉनसन ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व इमरान खान की लोकप्रियता को लेकर चिंतित है। उनके अनुसार, इमरान जेल से बाहर आते हैं तो दोबारा राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं। यह जॉनसन का राजनीतिक आकलन है। पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बोरिस जॉनसन ने यह भी स्पष्ट किया कि इमरान खान के साथ उनकी राजनीतिक सोच हर मुद्दे पर एक जैसी नहीं रही है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, तालिबान और अमेरिका को लेकर इमरान खान के रुख से अपनी असहमति का जिक्र किया। इसके बावजूद जॉनसन ने कहा कि राजनीतिक या नीतिगत मतभेदों के आधार पर किसी व्यक्ति को कथित तौर पर खराब जेल परिस्थितियों में रखने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
इमरान खान की जेल स्थिति को लेकर पाकिस्तान की अदालतों में भी मामला पहुंच चुका है। सितंबर की शुरुआत में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को एकांत कारावास में न रखा जाए। अदालत ने उन्हें रोजाना अखबार और किताबें उपलब्ध कराने तथा कम से कम एक घंटे की वॉक और एक्सरसाइज की सुविधा देने के निर्देश भी दिए थे। वहीं, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इससे पहले कहा था कि इमरान खान को जेल नियमों और अदालत के निर्देशों के तहत सुविधाएं मिल रही हैं और उन्हें दंडात्मक एकांत कारावास या दुर्व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ रहा है। इस तरह इमरान खान की जेल स्थिति को लेकर पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री के दावे, उनके परिवार और समर्थकों के आरोप तथा पाकिस्तानी अधिकारियों का पक्ष अलग-अलग हैं। मामले में अदालतों के निर्देश और आगे की कानूनी कार्यवाही महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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