Russia Sanctions Bill: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले कानून ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुल गया है। भारत और चीन समेत प्रमुख रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कानून
यह कानून रूस के युद्ध संबंधी वित्तीय संसाधनों को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया है। इसमें रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र, ओलिगार्क्स और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले विदेशी नेटवर्क पर कार्रवाई का प्रावधान है। रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाया गया है। कानून राष्ट्रपति को रूसी वस्तुओं पर 500% तक और रूसी तेल-गैस खरीदने वाले संबंधित देशों के सामान पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोट से पारित किया था। कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हुआ था।
भारत पर क्या असर?
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर के संशोधन में भारत, चीन, यूएई, तुर्किये, सिंगापुर, अजरबैजान, कजाखस्तान, हंगरी, किर्गिस्तान और स्लोवाकिया को संभावित 100% सेकेंडरी टैरिफ के दायरे में रखने की बात थी। हालांकि, कानून खुद भारत पर 100% शुल्क नहीं लगाता; यह ट्रंप को ऐसा करने का अधिकार देता है।
भारत पर कोई नया शुल्क लगाया जाता है तो उसका वास्तविक असर दर और प्रभावित उत्पादों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। इससे पहले रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था, जिसे फरवरी 2026 में हटा दिया गया था, जबकि पारस्परिक टैरिफ घटकर 18% हुआ था।
भारत ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बदलते बाजार हालात के अनुसार विविध स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाल के महीनों में इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चा हुई है और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संभावित प्रभाव स्पष्ट किए हैं।
रिपब्लिकन खेमे में भी चिंता
कानून को व्यापक रिपब्लिकन समर्थन मिला, लेकिन CNN की रिपोर्ट के अनुसार कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने निजी तौर पर पार्टी नेतृत्व से नए टैरिफ अधिकार हटाने की मांग की थी। उनकी चिंता थी कि इससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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