TMC Crisis Supreme Court: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी खींचतान शुक्रवार को और बढ़ गई। चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को दोनों गुटों के लिए फ्रीज कर दिया। इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।
सिंबल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
पहली याचिका में चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। ममता गुट का कहना है कि आयोग ने बहुसंख्यक कैडर और संगठनात्मक ढांचे की अनदेखी कर बागी गुट के दावों को प्राथमिकता दी। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं। ममता गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है।
दूसरी याचिका 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले में देरी से जुड़ी है। ममता गुट का तर्क है कि विधायकों की सदस्यता पर फैसला होने तक पार्टी के नाम-सिंबल को लेकर निर्णय नहीं होना चाहिए। मामले पर 21 सितंबर को सुनवाई संभव है।
10 बागी विधायकों पर अयोग्यता की लड़ाई
वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है। विधानसभा सचिवालय ने ऋतब्रत, अरूप राय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मिन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष को नोटिस देकर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।
नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी विवाद है। ममता गुट ने शोभनदेव को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत को मान्यता दी। हाईकोर्ट ने अगस्त में तत्काल राहत नहीं दी थी।
नंदीग्राम में बदला पूरा चुनावी समीकरण
6 अक्टूबर के नंदीग्राम उपचुनाव से पहले ममता गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले उन्होंने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की और कहा कि यह INDIA गठबंधन को मजबूत करने के लिए है।
लेकिन कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ पुराने मामलों और लंबित कार्रवाई का उल्लेख सामने आया है। कांग्रेस और ममता गुट ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जबकि BJP ने आरोपों को खारिज कर इसे कानून के मुताबिक पुलिस कार्रवाई बताया।
28 साल पुरानी पार्टी पहचान पर संकट
ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी और ‘जोड़ा फूल’ पार्टी की पहचान बन गया। अब दोनों गुट मूल नाम और चिह्न पर दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के तहत अक्टूबर के उपचुनाव अलग नाम और प्रतीकों के साथ लड़े जाएंगे।
राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया और BJP पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए। BJP ने पलटवार करते हुए इसे विपक्ष की प्रतिक्रिया बताया और कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। अब TMC के नाम-सिंबल और बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम होगी।

