Britannia Biscuit Price Hike: देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज आने वाले महीनों में अपने उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर सकती है। कच्चे माल और उत्पादन लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण कंपनी पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को जल्द ही बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पादों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
कंपनी प्रबंधन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उत्पादों की कीमतों में करीब 1.5 से 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है। हाल ही में किए गए मूल्य संशोधन से लागत का पूरा असर कम नहीं हो पाया है, जिसके चलते कंपनी को अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है।
ब्रिटानिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन उत्पादों की है, जो 5 और 10 रुपये की कीमत वाले पैक में बिकते हैं। इनकी कीमत सीधे बढ़ाने से बिक्री प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कंपनी 'श्रिंकफ्लेशन' की रणनीति अपना सकती है। इस रणनीति के तहत उत्पाद का मूल्य वही रहेगा, लेकिन पैकेट में मिलने वाली मात्रा या वजन कम कर दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को कीमत में बदलाव महसूस नहीं होगा, लेकिन उन्हें पहले की तुलना में कम उत्पाद मिलेगा।
कंपनी पर उत्पादन लागत का दबाव कई स्तरों पर बढ़ा है। बिस्किट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की कीमतों में हाल के महीनों में तेज उछाल आया है। इसके अलावा पाम ऑयल और चीनी जैसी आवश्यक सामग्री भी महंगी हुई हैं। इन सभी कारणों से उत्पादन खर्च लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन-किन उत्पादों पर कीमतों का असर पड़ेगा, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय ब्रांड्स पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इससे पहले कंपनी अपने चर्चित बिस्किट ब्रांड Good Day के कुछ फैमिली पैक्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है।
महंगाई के दबाव के बावजूद कंपनी की बिक्री मजबूत बनी हुई है। ऑनलाइन और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए ब्रिटानिया स्वास्थ्यवर्धक और प्रोटीन आधारित उत्पादों के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है। कंपनी विशेष रूप से उन उत्पादों पर काम कर रही है, जिनकी मांग ऑनलाइन ग्राहकों के बीच अधिक है।
यदि लागत में बढ़ोतरी का दबाव जारी रहता है, तो आने वाले समय में ब्रिटानिया के कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं। कंपनी सीधे कीमत बढ़ाने के साथ-साथ पैकेट की मात्रा कम करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। ऐसे में चाय के साथ पसंदीदा बिस्किट का स्वाद बरकरार रहेगा, लेकिन उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर जरूर पड़ सकता है।
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