British citizens PoK protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच झड़प के दौरान एक ब्रिटिश नागरिक की गोली लगने से मौत हो गई। वहीं, एक अन्य ब्रिटिश नागरिक दो महीने से अधिक समय से मीरपुर की जेल में बंद है। यह घटनाक्रम PoK में जून से जारी प्रदर्शनों और कार्रवाई के बीच सामने आया है।
पीटरबरो निवासी 50 वर्षीय मोहम्मद अख्तर 9 जून को कोटली में थे, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा हुई थी। उनके परिवार के मुताबिक, अख्तर प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और घर के पास एक आवारा गोली का शिकार हुए। उनके सीने के पास गोली लगी। परिवार ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने और कार्रवाई बढ़ने पर निशाना बनाए जाने के डर से ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष मामला नहीं उठाया।
नॉटिंघम निवासी वकास आरिफ को 5 जून के प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था। परिवार का दावा है कि वह प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों व रेंजर्स ने घर में घुसकर उन्हें गिरफ्तार किया। उनकी बहन का कहना है कि उन पर कोई आरोप नहीं है। पत्नी वारिशा कम्पुलवी के मुताबिक, ब्रिटिश अधिकारी अब तक उनसे सीधे संपर्क नहीं कर पाए हैं। 26 जून को UK विदेश कार्यालय ने बताया था कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने आरिफ के स्वस्थ होने की जानकारी दी थी।
JAAC के नेतृत्व में प्रदर्शन पहले बिजली की ऊंची दरों और सब्सिडी वाले आटे की मांगों को लेकर शुरू हुए थे। बाद में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें खत्म करने की मांग भी जुड़ गई। रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 90 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। 27 जुलाई से शुरू हुए तीन चरणों के चुनाव के दौरान हिंसा फिर बढ़ी। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन चुनावों को "पूरी तरह दिखावा" बताते हुए कार्रवाई की आलोचना की। पाकिस्तान ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, हालांकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत की संभावना जताई है।
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय ने PoK की स्थिति पर "गहरी चिंता" जताई है। ब्रिटिश मंत्री और इस्लामाबाद स्थित UK हाई कमिश्नर पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में हैं। जून में कम से कम 30 ब्रिटिश सांसदों ने भी सरकार से तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास करने की मांग की थी। UN महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि एंटोनियो गुटेरेस, UN मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के प्रयासों का समर्थन करते हैं। तुर्क ने 17 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की मौतों, JAAC पर प्रतिबंध और उसके नेताओं की गिरफ्तारी की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
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