Cauvery Water Dispute:कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद गहरा गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कर्नाटक की अपील खारिज किए जाने के बाद राज्य के कई हिस्सों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जलाशयों में पानी की उपलब्धता पहले से ही सीमित है और ऐसे समय में अतिरिक्त पानी छोड़ना राज्य के कृषि क्षेत्र पर असर डाल सकता है।
प्राधिकरण ने बरकरार रखा पुराना आदेश
प्राधिकरण ने अपने पहले के निर्देश को कायम रखते हुए कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद मांड्या और मैसूर समेत कई क्षेत्रों में किसानों ने नाराजगी जताई और सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।
किसानों ने जताई चिंता
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि राज्य के कई हिस्सों में बारिश और जल भंडारण की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में पानी छोड़ने से सिंचाई और खेती पर असर पड़ सकता है। विरोध के दौरान कुछ स्थानों पर चक्का जाम और प्रदर्शन भी देखने को मिले।
बीजेपी ने भी उठाए सवाल
कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी फैसले पर चिंता जताई। उनका कहना है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है और राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना लिया गया फैसला किसानों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से किसानों का भरोसा बनाए रखने और उनकी चिंताओं का समाधान करने की मांग की।
कावेरी जल विवाद लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच संवेदनशील मुद्दा रहा है। ताजा फैसले के बाद कर्नाटक में बढ़ता विरोध यह दिखाता है कि जल बंटवारे का यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।
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