पश्चिम बंगाल का एक 5 साल का बच्चा करीब तीन साल से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। उसे लगातार दस्त होते थे और शरीर में सूजन रहती थी। कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद बीमारी की सही वजह सामने नहीं आ सकी।
इस दौरान बच्चे में पोषण और प्रोटीन की गंभीर कमी हो गई। उसका शारीरिक विकास भी प्रभावित होने लगा। डॉक्टरों ने अलग-अलग संभावित बीमारियों के आधार पर इलाज किया। उसे स्टेरॉयड समेत कई दवाएं भी दी गईं।
आखिरकार जेनेटिक जांच से बीमारी की असली वजह सामने आई। बच्चे में CHAPLE syndrome की पुष्टि हुई।
शरीर से लगातार कम हो रहा था जरूरी प्रोटीन
जांच में बच्चे के शरीर में एल्ब्यूमिन का स्तर काफी कम पाया गया। इसके अलावा एंटीबॉडी का स्तर भी सामान्य से काफी नीचे था।
दरअसल, CHAPLE syndrome में आंतों के जरिए शरीर से जरूरी प्रोटीन और इम्यून प्रोटीन का नुकसान हो सकता है। इससे मरीज में सूजन, दस्त और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बच्चे की हालत ऐसी हो गई थी कि उसे करीब हर दो सप्ताह में एल्ब्यूमिन और इम्युनोग्लोबुलिन का इन्फ्यूजन देना पड़ता था।
इन उपचारों से कुछ समय के लिए राहत मिलती थी। हालांकि, बीमारी की मूल वजह का इलाज नहीं हो पा रहा था।
जेनेटिक टेस्ट से मिला बीमारी का जवाब
लगातार इलाज के बावजूद सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी की संभावना पर ध्यान दिया।
इसके बाद बच्चे की जेनेटिक जांच की गई। टेस्ट में CD55 जीन में म्यूटेशन सामने आया। इसके आधार पर बच्चे में CHAPLE syndrome की पहचान हुई।
इस बीमारी का पूरा नाम CD55 deficiency with hyperactivation of complement, angiopathic thrombosis, and protein-losing enteropathy है।
यह एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर की कॉम्प्लीमेंट इम्यून सिस्टम प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो सकती है। इसका असर आंतों और लसीका तंत्र पर पड़ सकता है।
CHAPLE syndrome में क्या होता है?
CHAPLE syndrome के कारण शरीर से प्रोटीन का असामान्य नुकसान हो सकता है। इसके चलते खून में एल्ब्यूमिन और इम्युनोग्लोबुलिन का स्तर कम हो सकता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
- लंबे समय तक दस्त
- शरीर और चेहरे पर सूजन
- प्रोटीन की कमी
- बार-बार संक्रमण
- पोषण की कमी
- बच्चों में विकास प्रभावित होना
बीमारी दुर्लभ होने के कारण इसकी पहचान आसान नहीं होती। इसके लक्षण कई दूसरी आंतों और प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों से मिल सकते हैं।
सामान्य बीमारियों से मिलते हैं लक्षण
विशेषज्ञों के मुताबिक CHAPLE syndrome की पहचान में सबसे बड़ी चुनौती इसके लक्षण हैं। ये कई दूसरी बीमारियों जैसे सीलिएक डिजीज और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से मिल सकते हैं।
कुछ मामलों में प्रोटीन की कमी और सूजन के कारण नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसी स्थितियों का भी संदेह हो सकता है।
इस बच्चे में लगातार प्रोटीन की कमी और कम एल्ब्यूमिन के साथ एंटीबॉडी का स्तर भी कम था। इन संकेतों के बाद डॉक्टरों ने आनुवंशिक बीमारी की जांच कराने का फैसला किया।
Pozelimab से शुरू हुआ टार्गेटेड इलाज
बीमारी की पुष्टि होने के बाद बच्चे का इलाज pozelimab नाम की टार्गेटेड थेरेपी से शुरू किया गया।
यह उपचार CHAPLE syndrome में सक्रिय कॉम्प्लीमेंट प्रक्रिया को निशाना बनाता है। यानी दवा बीमारी के पीछे मौजूद खास जैविक प्रक्रिया पर काम करने के लिए दी जाती है।
इलाज शुरू होने के करीब 10 दिनों के भीतर बच्चे की सूजन में कमी दिखाई देने लगी। उसकी गतिविधियों और सामान्य स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ।
बाद की जांच में उसके प्रोटीन और एंटीबॉडी स्तर में भी सुधार देखा गया।
हर दो सप्ताह अस्पताल जाने की जरूरत हुई कम
इलाज का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि बच्चे की नियमित एल्ब्यूमिन और इम्युनोग्लोबुलिन इन्फ्यूजन पर निर्भरता खत्म हो गई।
पहले उसे लगभग हर 15 दिन में अस्पताल जाकर इन्फ्यूजन लेना पड़ता था। टार्गेटेड थेरेपी के बाद उसकी स्थिति में इतना सुधार हुआ कि इस तरह के बार-बार होने वाले उपचार की जरूरत नहीं रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज के दौरान अब तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है।
रेयर डिजीज की पहचान में जेनेटिक जांच अहम
यह मामला बताता है कि लंबे समय तक किसी बीमारी के लक्षण बने रहने पर दुर्लभ आनुवंशिक कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
CHAPLE syndrome जैसी बीमारियों में शुरुआती लक्षण दूसरी सामान्य बीमारियों से मिल सकते हैं। ऐसे मामलों में सही समय पर जेनेटिक टेस्ट बीमारी की पहचान में अहम भूमिका निभा सकता है।
बच्चे के मामले में भी यही जांच बीमारी की असली वजह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सही निदान के बाद लक्षित उपचार शुरू किया गया और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया।

