अध्यात्म

Chhath Puja 2025 : माता सीता और द्रौपदी ने रखा था पहला छठ व्रत, जानें पौराणिक कथा

Chhath Puja 2025 : आस्था, श्रद्धा और शुद्धता का प्रतीक लोकपर्व छठ का शुभारंभ 25 अक्तूबर से हो रहा है। यह चार दिवसीय पर्व नहाय-खाय से शुरू होकर 28 अक्तूबर को उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। इस दौरान श्रद्धालु सूर्य देव और छठी माई की आराधना करते हैं। छठ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनोखा उत्सव है।

छठ पर्व की पौराणिक जड़ें

छठ महापर्व की महिमा सिर्फ लोक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें त्रेता और द्वापर युग तक फैली हुई हैं। माना जाता है कि रामायण और महाभारत दोनों काल में सूर्योपासना की यह परंपरा प्रचलित थी। इसी कारण छठ को सनातन संस्कृति के सबसे प्राचीन पर्वों में गिना जाता है।

रामायण काल में छठ की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे, तो उन्होंने रावण वध के पश्चात आत्मशुद्धि हेतु ऋषि-मुनियों की सलाह पर राजसूय यज्ञ करने का निश्चय किया। इस अवसर पर मुद्गल ऋषि ने उन्हें अपने आश्रम आने का निमंत्रण दिया।

ऋषि के आदेशानुसार जब भगवान राम और माता सीता उनके आश्रम पहुंचे, तो मुद्गल ऋषि ने गंगा जल से सीता जी का शुद्धिकरण किया और उन्हें शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य देव की उपासना करने का निर्देश दिया। माता सीता ने पूर्ण श्रद्धा से सूर्य की आराधना की, और तभी से यह परंपरा छठ महापर्व के रूप में प्रचलित हुई।

महाभारत काल से भी जुड़ा है संबंध

महाभारत काल में भी छठ का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि जब पांडवों ने जुए में अपना सब कुछ गंवा दिया, तब द्रौपदी ने सूर्यदेव की उपासना करते हुए छठ व्रत रखा था। व्रत के प्रभाव से पांडवों को पुनः अपना राज्य प्राप्त हुआ। अन्य कथा के अनुसार, सूर्यपुत्र कर्ण ने सबसे पहले इस व्रत की शुरुआत की थी। वे प्रतिदिन जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे, जिसके आशीर्वाद से ही वे महान योद्धा बने।

लोक आस्था का विस्तार

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में यह पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है, लेकिन अब इसकी आस्था सीमाओं से परे फैल चुकी है। भारत के साथ-साथ विदेशों में बसे प्रवासी भारतीय भी पूरे विधि-विधान से छठ मनाते हैं। यह पर्व न केवल सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है, बल्कि मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का भी संदेश देता है। छठ के अवसर पर व्रतधारी महिलाएं (पारण) उपवास रखकर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

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डिस्क्लेमर : यह लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी जानकारी और तथ्यों की सटीकता के लिए न्यूज़ इंडिया 24×7 जिम्मेदार नहीं है।

Shweta Gupta

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