Coffee & Migrane: माइग्रेन से पीड़ित लोगों को अक्सर कॉफी को लेकर अलग-अलग सलाह मिलती है। कुछ लोग मानते हैं कि एक कप कॉफी सिरदर्द से राहत दिलाती है, जबकि कुछ के लिए यही कैफीन माइग्रेन का कारण बन सकती है। वहीं, जो लोग नियमित रूप से अधिक कॉफी पीते हैं, उनमें अचानक कॉफी छोड़ने पर भी सिरदर्द शुरू हो सकता है।
डॉ. राहुल चावला ने क्या बताया?
AIIMS, नई दिल्ली से प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट, लाजपत नगर स्थित IBS Hospital के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और HealthPil.com के संस्थापक डॉ. राहुल चावला ने 21 मई को साझा किए गए एक इंस्टाग्राम वीडियो में माइग्रेन और कॉफी के बीच संबंध को समझाया। उनके अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन एडेनोसिन रिसेप्टर्स को ब्लॉक करती है, जिससे मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। माइग्रेन के दौरान ये रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ता है। ऐसे में कैफीन इस फैलाव को कम करके सिरदर्द से राहत दिला सकती है। डॉ. चावला ने बताया कि यही वजह है कि कुछ दर्द निवारक दवाओं में भी कैफीन मिलाई जाती है।
हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं है कॉफी
डॉ. चावला के अनुसार, कुछ लोगों में कॉफी खुद माइग्रेन का ट्रिगर बन सकती है। वहीं, जो लोग काफी ज्यादा कॉफी पीते हैं, उनमें अचानक कैफीन कम करने पर सिरदर्द शुरू हो सकता है, जिसे 'कैफीन विदड्रॉल हेडेक' कहा जाता है।
किसे कॉफी से बचना चाहिए?
डॉ. चावला का कहना है कि अगर कॉफी पीने के बाद माइग्रेन शुरू होता है, तो ऐसे लोगों को कॉफी से बचना चाहिए। वहीं, अगर सिरदर्द उस दिन होता है जब कॉफी नहीं पी जाती, तो यह कैफीन विदड्रॉल हेडेक का संकेत हो सकता है।
कितनी कॉफी पीना सुरक्षित माना जाता है?
न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से कॉफी पीते हैं, उनके लिए दिनभर में एक से दो कप कॉफी लेना आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है। लेकिन रोजाना तीन से चार कप से अधिक कॉफी पीने और फिर अचानक इसे कम करने पर विदड्रॉल हेडेक का खतरा बढ़ सकता है। डॉ. चावला के अनुसार, माइग्रेन के मामले में कॉफी हमेशा दुश्मन नहीं होती, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन, अनियमित सेवन और कैफीन पर निर्भरता निश्चित रूप से समस्याएं बढ़ा सकती हैं।
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