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कर्ज चुकाने को कर्ज! UAE ने कसा शिकंजा, शहबाज-मुनीर फंडिंग मिशन पर, सऊदी से मिली राहत

UAE Loan To Pakistan: पाकिस्तान की आर्थिक हालत एक बार फिर सुर्खियों में है। विदेशी कर्ज के दबाव में जूझ रहे पड़ोसी देश को तब बड़ा झटका लगा, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने दिए गए कर्ज की वापसी के लिए सख्त रुख अपना लिया। इसके बाद पाकिस्तान सरकार को फौरन वैकल्पिक फंडिंग की तलाश में जुटना पड़ा।

UAE की सख्ती से बढ़ी मुश्किल

सूत्रों के मुताबिक, UAE ने पाकिस्तान को दिए गए लगभग 3 अरब डॉलर के कर्ज को लौटाने के लिए साफ तौर पर कहा और किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले ने पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ा दिया।

‘डिप्लोमैटिक टूर’ पर शहबाज और मुनीर

हालात बिगड़ते देख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर सक्रिय हो गए। शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरे पर निकले वहीं आसिम मुनीर ईरान पहुंचे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय कूटनीति में भूमिका निभाने की कोशिश की। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन दौरों का मकसद सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि आर्थिक मदद हासिल करना भी था।

सऊदी अरब ने दिया सहारा

काफी प्रयासों के बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को करीब 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर सहमति जताई। यह रकम सीधे तौर पर UAE के कर्ज की अदायगी में मदद करेगी। इसके साथ ही सऊदी ने पाकिस्तान में पहले से जमा 5 अरब डॉलर की राशि के रोलओवर को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया, जिससे पाकिस्तान को कुछ राहत मिली है।

विदेशी मुद्रा भंडार की हकीकत

पाकिस्तान के पास फिलहाल करीब 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन वह इसे पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर सकता।

IMF की सख्त शर्तों के कारण खर्च पर नियंत्रण जरूरी है
वित्त वर्ष के अंत तक भंडार को 18 अरब डॉलर तक ले जाना अनिवार्य है

यानी एक तरफ कर्ज चुकाने का दबाव, दूसरी तरफ देश चलाने के लिए जरूरी आयात दोनों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान?

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति उस व्यक्ति जैसी हो गई है, जो पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेने पर मजबूर है। आर्थिक सुधारों की रफ्तार धीमी होने और बढ़ते खर्चों ने हालात को और जटिल बना दिया है।

आगे क्या?

फिलहाल सऊदी अरब से मिली मदद ने पाकिस्तान को तात्कालिक राहत जरूर दी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान अभी भी दूर नजर आता है।
अगर आर्थिक सुधारों पर तेजी से काम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऐसे संकट और गहरा सकते हैं। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह राहत स्थायी समाधान बनेगी या फिर कर्ज का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा?

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Shagun Chaurasia

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