दिल्ली/NCR

दिल्ली की हवा बनी ‘मौत की डीलर’! हर सातवीं जान ले रही जहरीली सांस, एक्सपर्ट्स ने दी भयावह चेतावनी

Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा अब सिर्फ बदबूदार नहीं, बल्कि जानलेवा बन चुकी है। नई रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, उसने देश की राजधानी को हिला दिया है। हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन इंस्टीट्यूट (IHME) की ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में हुई हर सातवीं मौत के पीछे वायु प्रदूषण जिम्मेदार है। यानी 2023 में लगभग 17,188 लोगों की जान जहरीली हवा ने ले ली, जो 2018 के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एनालिस्ट मनोज कुमार ने बताया कि दिल्ली में PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों से 9.4% डिसेबिलिटी एडजस्टेड लाइफ इयर्स (DALYs) प्रभावित हुए हैं। इसका मतलब है कि करीब 4.9 लाख लोग बीमारियों के कारण अपनी स्वस्थ जीवन अवधि खो चुके हैं। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक डरावनी हकीकत है। दिल्ली की हवा अब मौत का पैगाम बन चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतें प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण हो रही हैं। इन बीमारियों में हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर, COPD (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) और श्वसन संक्रमण शामिल हैं। तुलना करें तो हाई ब्लड प्रेशर से 14,874, डायबिटीज से 10,653 और हाई कोलेस्ट्रॉल से 7,267 मौतें हुईं, लेकिन प्रदूषित हवा इन सब पर भारी पड़ी।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक

AIIMS के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश सल्वे ने कहा कि भले ही आंकड़े अनुमानित हों, पर रुझान बेहद चिंताजनक हैं। “ये गणितीय मॉडल पर आधारित हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे भी गंभीर हो सकती है। अब वक्त है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर मल्टी-सेक्टरल एक्शन लें,” उन्होंने कहा। अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. निखिल मोदी का कहना है कि 15% का यह आंकड़ा “वास्तविकता के बेहद करीब” है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहना धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खत्म कर देता है।

धीरे-धीरे फेफड़ों और दिल होते है कमजोर

PSRI हॉस्पिटल की सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. नीतू जैन ने कहा कि “प्रदूषण तत्काल मौत का कारण नहीं बनता, बल्कि एक क्रॉनिक स्ट्रेसर की तरह काम करता है। जो धीरे-धीरे फेफड़ों और दिल को कमजोर करता है।” उन्होंने चेताया कि अगर अब भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो दिल्ली के आसमान में सांस लेना सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा।

दिल्ली की हवा अब सिर्फ धुंध नहीं, बल्कि धीमी मौत का बादल बन चुकी है और अगर हालात नहीं बदले, तो यह शहर सांसों से पहले लोगों की जान छीन लेगा।

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Shagun Chaurasia

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