मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इसे वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने अपने निर्णय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों को प्रमुख आधार बनाया। इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भोजशाला परिसर के सर्वे के दौरान ASI ने एक लंबे समय से बंद कमरे की जांच की। जब कमरे का ताला खोला गया, तो वहां कई प्राचीन प्रतिमाएं और धार्मिक अवशेष मिले। बरामद प्रमुख प्रतिमाओं में शामिल थे: गणेश की प्रतिमा,हनुमान जी की मूर्ति ,महिषासुर मर्दिनी स्वरूप में मां भगवती अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन आकृतियां ।इन खोजों को हिंदू पक्ष ने इस दावे के समर्थन में महत्वपूर्ण माना कि यह स्थल मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर और शिक्षा केंद्र रहा है।
ASI ने अदालत में लगभग 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में सर्वे और वैज्ञानिक जांच के दौरान मिले अनेक पुरातात्विक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया। मुख्य निष्कर्षों में शामिल थे: कमल और शंख जैसे धार्मिक प्रतीक, प्राचीन मूर्तियां और स्थापत्य अवशेष, पुराने सिक्के और पत्थर संरचनाएं । रिपोर्ट के अनुसार, परिसर की मूल नींव परमार कालीन स्थापत्य से जुड़ी प्रतीत होती है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि धार्मिक और शैक्षणिक महत्व का केंद्र रही है। फैसले में जिन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया मां सरस्वती मंदिर होने के पुरातात्विक संकेत, संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में ऐतिहासिक महत्व, ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट । कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने ASI के वर्ष 2003 के उन प्रशासनिक आदेशों को निरस्त कर दिया जिनके तहत पूजा और नमाज से संबंधित व्यवस्थाएं लागू थीं। साथ ही मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार से संपर्क करने का सुझाव दिया गया। भविष्य में परिसर के प्रबंधन और उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और ASI को लेना होगा।
ASI ने वर्ष 2024 में भोजशाला परिसर का लगभग 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसमें वास्तु संरचना, खुदाई, शिलालेखों और उपलब्ध वस्तुओं का तकनीकी परीक्षण शामिल था। इसी सर्वे की रिपोर्ट ने अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भोजशाला का निर्णय केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, धार्मिक और कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब केंद्र सरकार और ASI की भूमिका यह तय करेगी कि परिसर के प्रबंधन और संरक्षण की व्यवस्था किस प्रकार होगी।
धार भोजशाला मामले में बंद कमरे से मिली मूर्तियां, 2100 पन्नों की ASI रिपोर्ट और 98 दिन के वैज्ञानिक सर्वे ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण तथ्य रखे। इन साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और ASI के अगले कदम पर है।
IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…
Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…
AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…
Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…
ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…
CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…