दुर्गा पूजा में मांसाहारी भोजन को लेकर धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर बंगाल में सियासी विवाद बढ़ गया है।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल के लोगों से मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील की थी। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ टीएमसी के साथ बीजेपी के नेताओं ने भी आपत्ति जताई है।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति और परंपराएं होती हैं। उनके मुताबिक, बंगाल की दुर्गा पूजा की परंपरा दूसरे राज्यों से अलग है।
उन्होंने कहा कि कई राज्यों में नवरात्रि के दौरान लोग नौ दिनों तक शाकाहारी भोजन करते हैं। हालांकि, बंगाल में दुर्गा पूजा के चार दिनों का खान-पान और उत्सव का तरीका अलग है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि बंगाली परिवार पूरे साल बचत करते हैं, ताकि पूजा के दिनों में बाहर जाकर पसंद का खाना खा सकें। उन्होंने मांस और हिलसा मछली का भी जिक्र किया।
अग्निमित्रा पॉल ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बंगाल के लोगों को अपने खान-पान और जीवनशैली को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति से निर्देश लेने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अलग-अलग राज्यों की अपनी सांस्कृतिक पहचान है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस भी खुलकर सामने आ गई है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणी बंगाली समुदाय की संस्कृति का अपमान करती है। उन्होंने मांग की कि इस बयान को लेकर माफी मांगी जानी चाहिए।
इससे पहले पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि बंगाल के लोग क्या खाएंगे और क्या पहनेंगे, यह तय करने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं है।
दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि धार्मिक होने का दावा करने वाले लोगों को पूजा पंडाल के पीछे मांसाहारी भोजन नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने ऐसे लोगों को पाखंडी बताया था। साथ ही, धीरेंद्र शास्त्री ने बंगाल के लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील की थी।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद अब केवल खान-पान तक सीमित नहीं रहा। इसके साथ बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का मुद्दा भी जुड़ गया है।
एक तरफ धीरेंद्र शास्त्री अपने बयान पर कायम नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, बंगाल के राजनीतिक दल इसे राज्य की परंपराओं में दखल के तौर पर देख रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में कितना आगे बढ़ता है और क्या धीरेंद्र शास्त्री या उनके समर्थकों की ओर से इस पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने आती है।
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