35 हजार से ज्यादा निवेशकों से 500 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में यूपी STF ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया है।
मामला अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, कंपनी के जरिए लोगों को ज्यादा रिटर्न का भरोसा दिलाकर निवेश कराया गया। इसके बाद निवेशकों की रकम वापस नहीं की गई।
पुलिस के अनुसार, STF की नोएडा यूनिट और कोतवाली बदायूं पुलिस की संयुक्त टीम ने 7 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य के रूप में हुई है। दोनों भाई अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के निदेशक बताए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि दोनों करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे थे। गिरफ्तारी के बाद अब उनसे कथित वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि बदायूं, बरेली, पीलीभीत और आसपास के जिलों के लोगों से बड़ी रकम निवेश कराई गई थी। पुलिस के मुताबिक, कुल रकम 500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है।
अकेले बदायूं में करीब 15 हजार निवेशकों के इस कथित जालसाजी का शिकार होने की बात सामने आई है। वहीं, पूरे मामले में प्रभावित निवेशकों की संख्या 35 हजार से अधिक बताई जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने निवेशकों को सामान्य योजनाओं की तुलना में ज्यादा रिटर्न देने का भरोसा दिलाया था। इसी लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने कंपनी में अपनी रकम जमा की।
हालांकि, बाद में निवेशकों को रकम वापस मिलने में परेशानी होने लगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमा की गई रकम कहां इस्तेमाल हुई और कितनी संपत्ति से उसकी रिकवरी संभव है।
बदायूं की SSP अंकिता शर्मा के मुताबिक, दोनों भाइयों के खिलाफ बदायूं और बरेली में कई मामले दर्ज हैं। आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का रुख किया था।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद पुलिस के लिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
इससे पहले, बरेली रेंज के DIG ने आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर दोनों के लिए 50-50 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
अब जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ के साथ कथित तौर पर जमा की गई रकम और संपत्तियों का भी पता लगा रही हैं।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हजारों प्रभावित निवेशकों को राहत की उम्मीद जगी है। फिलहाल जांच का मुख्य फोकस कथित ठगी की पूरी रकम का पता लगाने और निवेशकों के पैसे की रिकवरी पर है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में आरोपियों के साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी की रकम और प्रभावित निवेशकों की संख्या में भी बदलाव सामने आ सकता है।
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