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दुनिया में गूंज रही है दीवाली की रौनक, विदेशों में भी छा गया रोशनी का पर्व

Diwali 2025 : दीवाली 2025 का त्योहार करीब आते ही पूरे देश में उत्साह और उल्लास का माहौल है। दीपों का यह पर्व न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। रोशनी, खुशियों और शुभता का प्रतीक यह त्योहार अब वैश्विक पर्व बन चुका है, जो बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश देता है।

भारत में पांच दिनों का उल्लास

भारत में दीवाली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर होता है। इन दिनों घरों की सफाई, रंगोली, दीये, मिठाइयां, उपहार और पूजा-पाठ का विशेष महत्व रहता है। अलग-अलग राज्यों में इसे मनाने की परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन सबका उद्देश्य खुशियां और समृद्धि का स्वागत करना है।

नेपाल: तिहार के रूप में दीवाली

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में दीवाली को ‘तिहार’ कहा जाता है। यह भी पांच दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसकी शुरुआत कौवों की पूजा से होती है। इसके बाद कुत्ते, गाय और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। अंतिम दिन ‘भाई टीका’ मनाई जाती है, जहां बहनें भाइयों के लंबे जीवन और सुख की कामना करती हैं।

श्रीलंका और मॉरीशस में परंपरा और उल्लास

श्रीलंका में विशेष रूप से तमिल समुदाय दीवाली को बड़े जोश और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाता है। घरों में दीये जलाए जाते हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। वहीं मॉरीशस में भारतीय मूल की बड़ी आबादी होने के कारण यह त्योहार बेहद लोकप्रिय है। यहां लोग कई सप्ताह पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं।

सिंगापुर और मलेशिया में हर ओर दीपों की जगमग

सिंगापुर की ‘लिटिल इंडिया’ दीवाली के समय पूरी तरह सज जाती है। रंग-बिरंगी लाइटें, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सड़कों पर उत्सव का माहौल बन जाता है। मलेशिया में इसे ‘हरि दीपावली’ कहा जाता है। लोग सुबह तेल स्नान करते हैं, पूजा करते हैं और अपने प्रियजनों से मिलते हैं।

पश्चिमी देशों में भी फैला प्रकाश

यूके, अमेरिका और कनाडा में भारतीय प्रवासियों के कारण दीवाली का उत्सव खूब लोकप्रिय हुआ है। ब्रिटेन के लीसेस्टर शहर में होने वाली दीवाली परेड दुनिया की सबसे बड़ी दीपोत्सव आयोजनों में से एक है। अमेरिका और कनाडा में भी स्थानीय प्रशासन इस मौके पर सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बहुसांस्कृतिक रंग

सिडनी, मेलबर्न और ऑकलैंड जैसे शहरों में दीवाली अब बहुसांस्कृतिक आयोजन बन चुकी है। स्थानीय सरकारें और नागरिक मिलकर इसे एकता, प्रेम और विविधता के प्रतीक के रूप में मनाते हैं।

ये भी पढ़े - दीवाली पर सफर बना मुसीबत : ट्रेनें फुल, बसों के किराए आसमान पर – यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

दीवाली अब सिर्फ भारतीय त्योहार नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया में रोशनी और सकारात्मकता का प्रतीक बन चुकी है। चाहे काठमांडू की गलियां हों या लंदन की सड़कों की चमक दीपों का यह पर्व हर दिल को रौशन कर रहा है।

Shweta Gupta

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