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93 के नीचे फिसला डॉलर, रुपया हुआ मजबूत, RBI के सख्त फैसलों ने बदला खेल

Rupee Rises Against US Dollar: सोमवार की सुबह भारतीय मुद्रा बाजार से एक बड़ी खबर आई। लंबे समय बाद रुपये ने डॉलर के मुकाबले दमदार वापसी करते हुए 93 के स्तर को तोड़ दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 33 पैसे मजबूत होकर 92.93 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर 93.10 से बेहतर है। यह करीब 0.2% की बढ़त है और बाजार में सकारात्मक संकेत दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूती अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया सख्त फैसलों का बड़ा हाथ है।

समझिए 3 बड़े कारण

  1. सट्टेबाजी पर कड़ा प्रहार
    RBI ने विदेशी बाजारों में होने वाले ‘ऑफशोर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स’ पर रोक लगाकर बड़ा कदम उठाया है। इससे रुपये की कीमत पर होने वाली अटकलें कम हुई हैं और स्थिरता बढ़ी है।
  2. डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर नई पाबंदियां
    अब अधिकृत डीलर्स को ‘नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स’ देने से रोका गया है। इससे रुपये से जुड़े जोखिम भरे सौदों पर नियंत्रण आया है।
  3. फॉरेन करेंसी डीलिंग में सख्ती
    बैंकों को अपनी ही संबद्ध कंपनियों के साथ विदेशी मुद्रा सौदे करने से रोक दिया गया है। इससे सिस्टम में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ा है।

इन फैसलों का असर इतना तेज रहा कि पिछले हफ्ते ही रुपये ने 2013 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी 1.8% की छलांग लगाई थी।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

रुपये की मजबूती का सीधा फायदा आम जनता को मिल सकता है।

विदेश से आयात होने वाले सामान जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं
महंगाई पर दबाव कम पड़ सकता है
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद बनती है

लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं

हालांकि रुपये की मजबूती अच्छी खबर है, लेकिन वैश्विक हालात अभी भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

मध्य-पूर्व में तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान को दी गई चेतावनी ने युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। इससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

महंगा कच्चा तेल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 109.75 डॉलर के पार पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए खतरे की घंटी है।

शेयर बाजार में दबाव

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ खुले। विदेशी निवेशकों ने भी करीब 9,931 करोड़ रुपये निकालकर बाजार से दूरी बनाई है।

आगे क्या रहेगा रुख?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और तेल की कीमतें काबू में नहीं आईं, तो रुपया फिर 94 के स्तर तक कमजोर हो सकता है। हालांकि, RBI की सख्ती फिलहाल रुपये को 91.50 से 92.00 के दायरे में बनाए रखने में मदद कर सकती है।

संतुलन की पतली डोर

रुपये की यह मजबूती राहत जरूर देती है, लेकिन वैश्विक हालात के बीच बाजार अभी भी संतुलन की पतली डोर पर टिका हुआ है। आने वाले दिनों में असली परीक्षा होगी क्या रुपया इस मजबूती को बरकरार रख पाएगा या फिर दबाव में आ जाएगा?

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Shagun Chaurasia

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