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पूर्व राज्यपाल और शिक्षाविद् डीवाई पाटिल का 90 साल की उम्र में निधन

by | Aug 4, 2026 | Breaking, News Featured

Dr D Y Patil Death: भारत के जाने-माने शिक्षाविद् और बिहार, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। करीब पांच दशकों तक उन्होंने महाराष्ट्र में निजी शिक्षा के क्षेत्र को नई दिशा दी। उनके संस्थानों के नेटवर्क में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अस्पताल शामिल हैं, जहां देशभर के लाखों छात्रों ने शिक्षा हासिल की।

गांव से शुरू हुआ सफर

22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर जिले में एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. पाटिल ने राजाराम कॉलेज से स्नातक किया और शिवाजी विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई फर्स्ट क्लास ऑनर्स के साथ पूरी की। हालांकि उन्होंने कानून की शिक्षा ली थी, लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान शिक्षा के क्षेत्र में रहा।

निजी शिक्षा का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया

डॉ. पाटिल को महाराष्ट्र में निजी उच्च शिक्षा के अग्रदूतों में गिना जाता है। उन्होंने ऐसे समय में इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि, मैनेजमेंट और आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में संस्थान स्थापित किए, जब प्रोफेशनल शिक्षा तक पहुंच सीमित थी। डीवाई पाटिल ग्रुप का विस्तार कोल्हापुर, नवी मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में हुआ और यह 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों व स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच गया। कई संस्थान बाद में विश्वविद्यालयों में विकसित हुए। उनके संस्थानों से डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल, नर्स और शोधकर्ता निकले।

राजभवन से पद्म श्री तक

शिक्षा के साथ डॉ. पाटिल ने संवैधानिक जिम्मेदारियां भी निभाईं। वह त्रिपुरा के राज्यपाल रहे, जिसके बाद बिहार और फिर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने। उन्होंने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से सक्रिय जुड़ाव बनाए रखा।

शिक्षा और समाजसेवा में योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनका काम स्वास्थ्य सेवा, परोपकार और खेल बुनियादी ढांचे तक भी फैला। 'डीवाई पाटिल' नाम आज विश्वविद्यालयों, डिग्री प्रमाणपत्रों और अस्पतालों से जुड़ा है। उनके निधन के साथ एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके संस्थान आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और अवसर देते रहेंगे।

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