El Niño 2026: इस साल का El Niño एक सदी से ज्यादा समय में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। ब्रिटेन के Met Office के मुताबिक, प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3°C से अधिक बढ़ सकता है। ऐसा हुआ तो यह आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड में दर्ज सभी El Niño घटनाओं को पीछे छोड़ देगा। इसका असर वैश्विक तापमान पर पड़ेगा और 2027 के 2024 को पीछे छोड़कर अब तक का सबसे गर्म साल बनने की आशंका है।
Met Office के लंबी अवधि के पूर्वानुमान प्रमुख एडम स्कैफ ने BBC से कहा कि 3°C से अधिक की बढ़ोतरी अभूतपूर्व होगी। उन्होंने बताया कि 2°C की वृद्धि भी बेहद बड़ी घटना मानी जाती है। 2015-16 का El Niño अब तक का रिकॉर्ड स्तर रहा है, जिसमें करीब 3°C का तापमान असामान्य रहा था।
Climate Brink का डैशबोर्ड, जो अमेरिकी NOAA के पूर्वानुमान मॉडल का इस्तेमाल करता है, नवंबर में El Niño के 3.9°C के तापमान अंतर तक पहुंचने का अनुमान दे रहा है। फिलहाल प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 30 साल के औसत से करीब 2.6°C अधिक है। स्कैफ ने इसे अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूर्वानुमानों में El Niño का इतना मजबूत संकेत पहले कभी नहीं देखा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान नहीं, बल्कि लंबे समय तक बने रहने वाली परिस्थितियों के संकेत हैं।
El Niño मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में असामान्य बढ़ोतरी की प्राकृतिक जलवायु घटना है। यह हवाओं, वायुदाब और बारिश के पैटर्न को दुनिया भर में प्रभावित करती है। आमतौर पर यह हर 2 से 7 साल में आता है और 9 से 12 महीने तक रहता है। इसका वैश्विक तापमान पर सबसे बड़ा असर अगले साल दिखाई देता है। Met Office के वैज्ञानिक निक डनस्टोन के मुताबिक, 2027 के 2024 की जगह सबसे गर्म साल बनने की बहुत ज्यादा संभावना है। 2024 में वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से 1.5°C से अधिक रहा था।
भारत में El Niño का असर पहले से मानसून पर दिख रहा है। Met Office के अनुसार देश में सामान्य से काफी कम बारिश हो रही है। IMD ने पूरे मानसून सीजन में बारिश दीर्घकालिक औसत की 90% रहने का अनुमान लगाया है, जो 11 वर्षों में सबसे कम है। IMD के वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत ने भी कहा कि 2027 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना काफी अधिक है। हालांकि, भारत में 2024 का तापमान रिकॉर्ड टूटेगा या नहीं, यह 2027 के मानसून और मानसून के बाद ENSO परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। उन्होंने अगले साल भारत में तेज गर्मी की लहरों की आशंका जताई।
University of Maryland के प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे के अनुसार, El Niño का असर मौजूदा रबी फसल से लेकर 2027 तक रह सकता है। 2023 और 2024 में भी El Niño के कारण भारत में हालात खराब रहे थे। इस साल रबी उत्पादन प्रभावित हो सकता है और सरकार खाद्य तेल व चीनी जैसे क्षेत्रों में पहले से सुरक्षा उपाय कर रही है। 2027 में मानसून अहम होगा, जबकि अगले वसंत में बढ़ती गर्मी और हीटवेव फसलों को फिर नुकसान पहुंचा सकती हैं। मुर्तुगुड्डे ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्रवाई की बातें तो होंगी, लेकिन यूरोप में हीटवेव, ऊर्जा आपूर्ति की समस्याओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच कई देश अपने लक्ष्यों से पीछे रह रहे हैं। El Niño नाम स्पेनिश शब्द है, जिसका अर्थ 'लड़का' या 'क्राइस्ट चाइल्ड' है। 19वीं सदी में पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों ने क्रिसमस से पहले तट के पास आने वाली असामान्य गर्म समुद्री धारा के लिए इसका इस्तेमाल किया था, जो मछलियों की संख्या घटा देती थी। भारत में El Niño आमतौर पर मानसून को कमजोर करता है।
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