Others

गोल्डन जुबली F-16 क्यों हो रहा है क्रैश? जानिए कितने देशों की एयर फोर्स में तैनात है यह अमेरिकी फाइटर जेट और भारत के पास क्या है इसका जवाब

F-16 Fighter Jet Crash: मंगलवार की देर रात एक मिशन में तुर्किए के पश्चिमी प्रांत बालिकेसिर में F-16 फाइटर जेट क्रैश हो गया। हादसे में पायलट की मौत हो गई। इसके बाद एक बार फिर यह फाइटर जेट चर्चा में आ गया है। बता दें कि गोल्डन जुबली मनाने वाले इस फाइटर जेट को कई देश अपनी एयर फोर्स की सबसे बड़ी ताकत बताते हैं, लेकिन कई देशों में इसके क्रैश की घटनाएं बढ़ीं जो इसके कामयाब और ताकतवर होने पर सवाल उठाते हैं।

ये भी पढ़ें: उड़ता यमराज! कैसे दुश्मनों के लिए काल बनेंगे 114 राफेल जेट्स? आइए जानते हैं एक नजर में

  • F-16 को किसने और कब बनाया, इसकी खासियत क्या है?
  • कितने देशों की एयर फोर्स के पास है F-16?
  • किन देशों के युद्धों में इस्तेमाल हो चुका है F-16
  • F-16 के क्रैश की घटनाएं कहां-कहां हुईं?
  • भारत के पास F-16 का जवाब क्या है?

आइये जानते हैं, आज के एक्प्लेनर में F-16 से जुड़े इन सवालों के जवाब और समझेंगे कि आखिर भारत ने इस अमेरिकी फाइटर जेट की जगह क्यों दी फ्रांस के राफेल को प्राथमिकता।

F-16 को किसने और कब बनाया, इसकी खासियत क्या है?

 F-16 यानी फाइटिंग फाल्कन फाइटर जेट इसे अमेरिका में जनरल डायनेमिक्स ने बनाया था और फिर बाद में लॉकहीड मार्टिन ने तैयार किया। वर्ष 1970 के दशक से एयर फोर्स में तैनात है। अमेरिका इस फाइटर जेट का समय समय पर अपग्रेड करता रहता है। खासियत है कि एक सिंगल-इंजन, सुपरसोनिक मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है। यह अत्यधिक पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम है और वायु-से-वायु युद्ध तथा वायु-से-सतह हमले में अपनी दक्षता सिद्ध कर चुका है। यह आवाज गति से तेज के साथ-साथ मिसाइलें, बम, रॉकेट, ईंधन टैंक ले जाने सक्षम है। एफ-16 में लगने वाली मिसाइलों की रेंज ज्यादा से ज्यादा 100 किलोमीटर के दायरे में है।

कितने देशों की एयर फोर्स के पास है F-16?

इस फाइटर जेट की पहली खेप अमेरिका की एयरफोर्स को मिली। इसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के अलावा बहरीन, बेल्जियम, मिस्र, ताइवान, हॉलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और थाईलैंड समेत 30 जैसे देशों को F-16 फाइटर जेट दिए। स्लोवाकिया और डेनामर्क भी इस फाइटर जेट को पाने की कतार में खड़े हैं। ये सभी देश इस फाइटर जेट को अलग-अलग ब्लॉक्स और मॉडर्नाइज्ड वर्ज़न में इस्तेमाल करते हैं। तमाम देशों के अपनी एयर फोर्स में इसे शामिल करने की वजह एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लैस होना और मल्टीरोल में होना है। इसके स्पेयर पार्ट्स भी आसानी से मिल जाते हैं। अब तक 4,600 से ज्यादा F-16 फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं।

F-16 के क्रैश की घटनाएं कहां-कहां हुईं?

अमेरिका के F-16 फाइटर जेट के क्रैश की घटनाएं कई देशों से सामने आई हैं। अमेरिका के अलावा पाकिस्तान, इजराइल, तुर्की, सिंगापुर, थाईलैंड, स्पेन, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, मोरक्को, यमन, जॉर्डन, सीरिया समेत कई देशों में फाइटर जेट F-16 के हादसे हो चुके हैं। हालांकि अमेरिका इसके अपग्रेडेशन पर काम कर रहा है। ताइवान ने अपने F-16 क्रैश होने के बाद सभी F-16 फाइटर जेट को ग्राउंडेड कर दिया है। F-16.net के अनुसार 2020 तक 670 से ज्यादा हुल-लॉस (पूरी तरह नष्ट) दुर्घटनाएं दर्ज हैं। बता दें कि नाटो देश अपने कई मिशनों में यह फाइटर जेट इस्तेमाल कर रहे हैं।

किन देशों के युद्धों में इस्तेमाल हो चुका है F-16

F-16 फाइटर जेट ने 1980 के दशक से लेकर अब तक कई वास्तविक युद्ध और सीमित सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया है। इसकी मल्टीरोल क्षमता और व्यापक तैनाती के कारण यह दुनिया के सबसे ज्यादा “कॉम्बैट-प्रूवन” फाइटर जेट्स में गिना जाता है। बता दें कि अब तक गल्फ वॉर (1991), इराक युद्ध (2003), अफगानिस्तान ऑपरेशन ISIS के खिलाफ, लेबनान युद्ध, सीरिया में एयर स्ट्राइक, गाज़ा ऑपरेशन व अफगान सीमा ऑपरेशन के अलावा भारत-पाक तनाव के दौरान इसका इस्तेमाल हो चुका है।

पाकिस्तान के F-16 का भारत के पास क्या है जवाब?

अमेरिका से F-16 फाइटर जेट लेने वालों में पाकिस्तान सबसे ऊपर है। यहीं वजह है कि पाकिस्तान अकसर भारत को हमले की धमकी देता है। पाकिस्तान के पास यह फाइटर जेट वर्ष 1981 से है। इस फाइटर जेट का पाकिस्तान ने अफगान युद्ध और सोवियत युद्ध में इस्तेमाल किया। वर्ष 1990 में अमेरिका ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के चलते उसे यह फाइटर जेट देने से इनकार कर दिया। लेकिन वर्ष 2001 में अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अल-क़ायदा के हमले के बाद 'वॉर ऑन टेरर' शुरू होने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को 18 आधुनिकतम ब्लॉक-52 एफ़-16 विमान देने पर सहमति जताई। ऐसा दावा है कि वर्ष 2025 में भारत के सिंदुर ऑपरेशन के जवाब में पाकिस्तान ने F-16 का इस्तेमाल किया। लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं दिखा। भारत ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर हमले किए और आतंकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। भारत के पास इसके जवाब में फ्रांस से खरीदा हुआ राफेल है। राफेल में ऐसा रडार सिस्टम है, जो कि F-16 में नहीं है। F-16 का रडार सिस्टम 84 किलोमीटर के दायरे में 20 लक्ष्यों पर निशाना लगा सकता है, लेकिन राफेल 100 किलोमीटर के दायरे में एक बार में 40 निशाने लगाने के लिए जाना जाता है. राफेल दुश्मन के विमानों को दूर से ही टारगेट कर लेता है। F-16 की कीमत जहां 600 करोड़ के आसपास है तो राफेल की कीमत 950 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। यहीं कारण है कि भारत ने अमेरिकी फाइटर जेट की जगह फ्रांस के राफेल फाइटर जेट को प्राथमिकता दी।

ये भी पढ़ें: पश्चिमी तुर्किए में टेकऑफ के 6 मिनट बाद क्रैश हुआ F16 फाइटर जेट, पायलट की हुई मौत

ज़हन में ऑपरेशन सिंदूर, राफेल के बाद अब रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर भारत की नजर

Anamika Anand

Recent Posts

ट्रंप को कोर्ट से बड़ा झटका, मीडिया बैन का फैसला रद्द, व्हाइट हाउस में एंट्री बहाल करने का आदेश

Trump White House Media Ban: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के CNN, MS NOW और…

25 minutes ago

एक्टर शाहरुख की नेटवर्थ में ₹2,500 करोड़ की गिरावट, फिर भी अमीर एक्टर्स की लिस्ट में किंग

Shah Rukh Khan Net Worth: बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान एक बार फिर भारत के…

31 minutes ago

वंदे भारत चेयर कार का हाई-स्पीड ट्रायल पूरा, 180 की रफ्तार के बाद अब इन टेस्ट की बारी

Vande Bharat Chair Car: वंदे भारत ट्रेन के नए चेयर कार रेक ने हाई-स्पीड ट्रायल…

2 hours ago

मरीन ड्राइव पर बेकाबू कार ट्रक में घुसी, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत 4 लोगों की हुई मौत

jamshedpur Marine Drive Accident: झारखंड के जमशेदपुर में गुरुवार तड़के रफ्तार का कहर देखने को…

2 hours ago

IPL 2027 Auction Venue: अब गोवा पहुंचा IPL ऑक्शन, BCCI दिसंबर में करवाएगी खिलाड़ियों की नीलामी

IPL 2027 Auction: आईपीएल 2027 की नीलामी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय…

3 hours ago