US Iran tension: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने लड़ाकू विमानों और सहायक विमानों सहित एक बड़े हवाई बेड़े की तैनाती की है। रिपोर्ट के अनुसार, यह तब हो रहा है जब अधिकारियों और सलाहकारों ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिकी अभियान शुरू होता है, तो यह केवल सीमित हमले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हफ्तों तक चलने वाले व्यापक सैन्य अभियान के रूप में सामने आ सकता है।
ईरान में महंगाई और आर्थिक असंतोष के कारण शुरू हुए विरोध प्रदर्शन बाद में सरकार विरोधी आंदोलनों में बदल गए। अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। अब मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है, और अमेरिका इसे रोकने के लिए प्रयास कर रहा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यह अमेरिकी हवाई शक्ति का इस क्षेत्र में सबसे बड़ा संचय है, जो 2003 में इराक पर हमले के बाद हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में अत्याधुनिक एफ-35 और एफ-22 लड़ाकू विमानों को लगातार मध्य पूर्व भेजा गया है।
साथ ही, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक पोत भी इस क्षेत्र में भेजा गया है, जबकि यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही ईरान के तट के करीब परिचालन में है। गेराल्ड आर. फोर्ड पर आक्रमण और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान तैनात किए गए हैं। बड़े हवाई अभियानों के लिए कमान और नियंत्रण विमान और महत्वपूर्ण मिसाइल रक्षा प्रणालियों की तैनाती भी की गई है।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर हमला करेंगे या नहीं। अगर हमला होता है, तो इसके उद्देश्य क्या होंगे, यह भी अज्ञात है। अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल शक्ति और खामेनेई सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान पर हमला करने की स्थिति में कई सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग दी गई है। इन विकल्पों में ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाना और सत्ता संरचना को कमजोर करना शामिल है। इसके अलावा, परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं पर हवाई हमले का विकल्प भी सुझाया गया है। ये अभियान हफ्तों तक चल सकते हैं। वर्तमान में तैनात अमेरिकी सैन्य शक्ति ट्रंप को ईरान पर लगातार हवाई हमले करने का विकल्प देती है। यह पिछले अमेरिकी हमलों से अलग होगा, जो तीन परमाणु स्थलों पर एक साथ किए गए थे।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ने अभी तक हमला करने का कोई आदेश नहीं दिया है। इस सप्ताह जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें यूरेनियम संवर्धन को लेकर संभावित समझौते पर चर्चा की गई। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों पक्ष अभी भी असहमति में हैं।
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