हरियाणा

फर्जी मान्यता का महाघोटाला: अल-फलह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन की हुई गिरफ़्तारी, ED ने कोर्ट से पाई 13 दिन की रिमांड

Haryana News: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलह यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित फर्जी मान्यता घोटाले में बड़ा धमाका हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट से 13 दिन की कस्टडी हासिल कर ली है। यह मामला अब शिक्षा जगत की सबसे बड़ी धोखाधड़ी में से एक माना जा रहा है, जिसने हजारों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात 11 बजे की गुप्त कार्रवाई

18 नवंबर की देर रात करीब 11 बजे ईडी की टीम अचानक जवाद सिद्दीकी के घर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी से जुड़ी सभी वजहें और दस्तावेज उनके वकील और पत्नी को सौंपे गए। यह कार्रवाई PMLA की धारा 19 के तहत की गई, जो गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में लागू होती है। दो FIR से खुली परतें UGC और NAAC मान्यता का झूठ। इस कार्रवाई से पहले दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 13 नवंबर को दो FIR दर्ज की थीं। आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने
फर्जी NAAC मान्यता दिखाई खुद को UGC की धारा 12B मान्यता प्राप्त संस्थान बताया, जबकि UGC ने साफ कहा कि अल-फलह को ऐसी कोई मान्यता कभी मिली ही नहीं। ईडी के मुताबिक, इन झूठे दावों का इस्तेमाल छात्रों को आकर्षित करने और मोटी फीस वसूलने के लिए किया गया।

415 करोड़ की कमाई और एक बड़ा झूठ!

ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 2014 से 2025 के बीच यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों ने 415.10 करोड़ रुपये की कमाई दिखाई। यह पूरी रकम उन वर्षों में आई, जब संस्थान के पास कोई भी वैध मान्यता नहीं थी। एजेंसी ने इस रकम को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम, यानी अपराध से जुटाया गया धन बताया। जांच में यह भी पाया गया कि इस कमाए हुए पैसे को कई बार परिवार से जुड़ी कंपनियों और कॉन्ट्रैक्टरों के खातों में भेजा गया। यूनिवर्सिटी के CFO ने अपने बयान में स्वीकार किया कि सभी वित्तीय फैसले खुद जवाद सिद्दीकी ही लेते थे और फाइनेंसिंग पर पूरा नियंत्रण उन्हीं का था।

कोर्ट ने माना मामला गंभीर

कोर्ट में ईडी ने दलील दी कि अभी कई डिजिटल रिकॉर्ड जुटाने, मनी ट्रेल समझने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है। साथ ही आरोपी के परिवार के कई सदस्य विदेश में हैं, इसलिए फरार होने की आशंका भी है। जवाद सिद्दीकी की ओर से 7 दिन की कस्टडी की मांग की गई और FIR को फर्जी बताया गया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। इसी आधार पर कोर्ट ने 19 नवंबर से 1 दिसंबर 2025 तक 13 दिन की ED रिमांड मंजूर की। अगले कुछ दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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Shagun Chaurasia

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